citizenship amendment bill

महाराष्ट्र में एनसीपी, कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चला रही शिवसेना ने विवादास्पद नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) का समर्थन करने का फैसला किया है। जबकि कांग्रेस ने पहले ही इस विधेयक को 'असंवैधानिक' करार दिया है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) पेश करने वाले हैं। यह विधेयक लोकसभा के दैनिक कामकाज के तहत सूचीबद्ध है। राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस विधेयक को लेकर विपक्ष की ओर से विरोध के स्वर उठ रहे हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले बुधवार को इस विधेयक को मंजूरी दी थी।

संघ का मानना है कि सिटीजन अमेंडमेंट बिल का समर्थन बीजेपी विरोधी दल भी करेंगे और ये आसानी से संसद के दोनों में पास हो जाएगा।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस मांग को 2003 में तब विपक्ष के नेता मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में उठाया था। वही कांग्रेस जो अभी सरकार के द्वारा लाए इस बिल का विरोध कर रही है वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय संसद में खड़े होकर इस बात के लिए सरकार को तैयार करने के लिए दवाब बनाने की कोशिश कर रही थी।

नागरिकता संशोधन विधेयक को मिली मोदी कैबिनेट की मंजूरी

नागरिकता संशोधन विधेयक को आज मोदी कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। इस मुद्दे पर कैबिनेट की बैठक संसद भवन के एनक्सी बिल्डिंग में हुई। सरकार इसी सत्र में नागरिकता संशोधन बिल को लोकसभा में पेश करेगी।

इस सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल को लेकर केंद्र सरकार बहुत आशान्वित है। इस बिल के जरिए बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसम्बर 2014 से पहले भारत आए गैर-मुस्लिम आबादी को नागरिकता दी जाएगी। इसमे हिंदू, क्रिश्चियन, जैन, बौद्ध शामिल होंगे। 

जाने-माने गायक भूपेन हजारिका के बेटे तेज हजारिका ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक के विरोध में इस साल मोदी सरकार की ओर से मिलने वाले ‘भारत रत्न’ अवॉर्ड को लेने से इनकार कर दिया है।

नागरिकता संशोधन बिल का पूर्वोत्तर और खासकर असम में इसलिए विरोध हो रहा है, क्योंकि कहा जा रहा है कि इससे राज्य की डिमॉग्राफी बदल सकती है।

नई दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट ने सोमवार को बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता देने के लिए...