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प्रियंका गांधी ने आधिकारिक तौर पर राजनीति में कदम रख दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका को ईस्ट यूपी की कमान सौंप दी है। अब ऐसी अटकलें भी चल रही हैं कि पार्टी प्रियंका को प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी के खिलाफ वाराणसी से मैदान में उतार सकती है।

तेलंगाना में विधानसभा चुनाव पूर्व गठबंधन करने के बाद मिली असफलता के मद्देनज़र कांग्रेस ने फैसला किया है कि वो आंध्र प्रदेश में विधानसभा व लोकसभा के लिए अकेले चुनाव लड़ेगी।

लोकसभा चुनाव 2019 से कुछ ही समय पहले कांग्रेस ने अपना ट्रंप कार्ड चल दिया है और वो है प्रियंका गांधी वाड्रा की राजनीति में एक्टिव एंट्री।

प्रियंका गांधी को कांग्रेस पार्टी में महासचिव बनाया गया है और लोकसभा चुनाव 2019 के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। इसी के साथ प्रियंका ने सक्रिय और औपचारिक तौर से राजनीति में एंट्री कर ली है

चुनाव में ईवीएम की हैकिंग का मामला तूल पकड़ रहा है। सत्ता और विपक्षी पार्टियां कह रही हैं कि उन्होंने ईवीएम हैकिंग के लिए किसी से संपर्क नहीं किया।

मध्यप्रदेश के पथरिया से बीएसपी विधायक रमाबाई अहिरवार ने कमलनाथ सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उन्हें मंत्रीपद नहीं मिलता है तो उनका हाल भी कर्नाटक जैसा होगा।

मध्य प्रदेश की प्रमुख लोकसभा सीटों से दिग्गज लोगों को चुनाव लड़ाने की कांग्रेस की ओर से मांग उठ रही है। भोपाल से प्रियंका गांधी और इंदौर से फिल्म अभिनेता सलमान खान को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाए जाने की मांग की गई है।

पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रति अपार सम्मान के बावजूद सबसे पुरानी पार्टी को उत्तर प्रदेश में चुनावी गठबंधन से इसलिए बाहर रखा ताकि चुनावी अंकगणित को सही रख हुए भाजपा को मात दी जा सके।

लोकसभा चुनाव होने में  अब कुछ दिनों का इंतजार और रह गया है। ऐसे  में हर एक पार्टी अपनी - अपनी रणनीति बनाने में लग गई है। पक्ष और विपक्ष लगातार एक-दूसरे पर वार - पलटवार कर रहा है और जनता को चुनावी रणनीतियों से लुभाने की कोशिश कर रहा है।आने वाले लोकसभा चुनाव में विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा, इस सवाल का जवाब हर कोई अपनी ओर से तलाश रहा है।

कांग्रेस नेता ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया और पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच सोमवार रात अचानक हुई मुलाकात के बाद मध्‍य प्रदेश में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है।