CWC

कांग्रेस इन दिनों भीतरी कलह से जूझ रही है। लोकसभा चुनाव में भारी हार के बाद कांग्रेस के भीतर काफी उथल-पुथल मची हुई है। पहले राहुल गांधी ने अध्यक्ष का पद छोड़ा और उनकी मां सोनिया ने उसे संभाल लिया।

सोनिया गांधी को कांग्रेस नेताओं ने एक बार फिर से पार्टी की बागडोर सौंप दी है। 72 दिन यानी करीब ढाई महीने की उहापोह की स्थिति के बाद सोनिया गांधी को फिर से कांग्रेस का सिरमौर बनाया गया है।

कांग्रेस अध्यक्ष पद पर फैसला के लिए शनिवार को कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) की बैठक रात 8 बजे दोबारा होगी। इसमें राहुल गांधी के उत्तराधिकारी पर फैसला लिया जाएगा।

नया कांग्रेस अध्यक्ष चुनने के लिए जोन के हिसाब से पांच नेताओं की टीम बनाई गई है, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी के भी नाम शामिल थे। लेकिन सोनिया ने इस बात पर ऐतराज जताया और खुद को और राहुल को इस कमेटी से अलग कर लिया।

2019 लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त मिलने पर राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस अबतक अपने नए नेता का चयन नहीं कर पाई है। जिसके बाद अब संभावना है कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) शनिवार यानी आज अंतरिम अध्यक्ष के रूप में नए नेता का ऐलान कर सकती है।

कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने ट्वीट किया, "सीडब्ल्यूसी की अगली बैठक 10 अगस्त सुबह 11 बजे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) मुख्यालय में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।"

इसके तहत कार्यसमिति की बैठक बुलाकर राहुल गांधी का इस्तीफा मंजूर किया जाए और उनके कामकाज की तारीफ की जाए। इसके बाद महासचिवों को अधिकार दे दिए जाएं, जिससे जिन राज्यों में चुनाव हैं वहां के वो फैसले कर सकें। साथ ही संगठन के चुनाव कराने को मंजूरी दे दी जाए।

इस दौरान सभी सांसदों ने राहुल गांधी से इस्तीफा नहीं देने की सिफारिश की। लेकिन राहुल गांधी ने किसी की बात नहीं मानी और उन्होंने पार्टी के सांसदों से साफतौर से कहा कि, वह कांग्रेस अध्यक्ष नहीं रहेंगे। 

कांग्रेस की ये बैठक संसद सत्र से पहले हुई है। इस बैठक में एके एंटनी, जयराम रमेश, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे मौजूद थे। बैठक पार्टी के वरिष्ठ नेता एके एंटनी की अध्यक्षता में हुई।

इस बार कांग्रेस ने मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम समेत कई नेताओं के बेटों को टिकट दिए थे। जिसकी वजह से उनके प्रचार करने का दायरा काफी सीमित रहा।