Defence Minister Rajnath Singh

मॉस्को की उनकी यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पूर्वी लद्दाख में सीमा मुद्दे को लेकर चीन के साथ भारत के संबंध बिगड़ गए हैं। दोनों देशों की सेनाएं सीमा संबंधी मुद्दों पर आमने-सामने हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा, 'रूसी उपप्रधानमंत्री युरी इवानोविक बोरिसोव से मेरी बातचीत बहुत सकारात्‍मक रही। महामारी की कठिनाइयों के बाद भी हमारे द्विपक्षीय संबंध बने हुए हैं। मुझे भरोसा दिलाया गया है कि जो समझौते किए जा चुके हैं, उन्हें जारी रखा जाएगा। यही नहीं कई मामलों में इनको बहुत कम समय में पूरा किया जाएगा।'

राजनाथ सिंह का ये दौरा तीन दिनों का होगा, जहां पर वो रूस की विक्ट्री डे परेड के 75 साल पूरा होने पर कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

लद्दाख में चीन के साथ तनाव को लेकर रक्षा मंत्री चीनी नेताओं से ऐसे समय मुलाकात नहीं करने का फैसला किया है जब इस मुद्दे पर अमेरिका ने भारत के साथ एकजुटता जाहिर की है।

वहीं एलएसी पर हुई हिंसा और भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चीन को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमारे जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।

एलएसी पर हुई भारतीय सैनिकों की शहादत को लेकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि हमारे सैनिकों ने कर्तव्य की राह में अनुकरणीय साहस और वीरता प्रदर्शित की है।

राजनाथ सिंह ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ साउथ ब्लॉक में बैठक करने के बाद मोदी से मुलाकात की। 1975 के बाद से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ संघर्ष में भारतीय सेना के जवानों के शहीद होने की यह पहली घटना है।

उन्होंने कहा,'हमारे यहां गोरखा रेजिमेंट ने समय समय पर अपने शौर्य का परिचय दिया है। उस रेजिमेंट का उद्घोष है कि “जय महाकाली आयो री गोरखाली”। महाकाली तो कलकत्ता, कामाख्या और विंध्यांचल में विद्यमान हैं। तो कैसे भारत और नेपाल का रिश्ता टूट सकता है?

राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा, ‘रक्षा मंत्री का हाथ पर कमेंट करना खत्म हो जाए, तो वह इस सवाल का जवाब दे सकते हैं- क्या लद्दाख में चीनी सैनिकों ने भारतीय जमीन पर कब्जा किया है?’

राजनाथ सिंह ने कहा, 'कोरोना संकट में भी प्रधानमंत्री ने जिस तरह देश को तैयार किया, उससे लोगों ने दांतो तले अंगुली दबा ली। जनता कर्फ्यू और लॉकडाउन का लोगों ने जिस तरह पालन किया वो प्रशंसा के योग्य है। कोरोना वॉरियर्स के सम्मान में देश सामने आया। ये देश की सामुहिक शक्ति नहीं है तो क्या है?'