Farmer Movement

कृषि कानूनों को लेकर सड़क से संसद तक घमासान जारी है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को लेकर विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। वहीं, भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, हम आर्थिक मामलों की जानकारी के लिए गीता गोपीनाथ जैसे लोगों के पास जाते हैं जबकि विपक्ष के लोग रिहाना, मिया खलीफा और ग्रेटा थनबर्ग के रास्ते पर चलते हैं।

Farmers Protest: वहीं भारतीय किसान यूनियन के पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह (Chaudhary Virendra Singh) ने भी जमकर कई चैनलों पर किसान नेता राकेश टिकैत पर हमला बोला। उन्होंने सीधे तौर पर इस आंदोलन को किसान आंदोलन कहने से मना कर दिया और कहा कि यह आंदोलन किसानों का आंदोलन ही नहीं है। उन्होंने कहा कि जिसने कुर्ता-पैजामा पहन लिया वह कहां से किसान नेता हो गया यह तो सीधे तौर पर राजनेतिक आंदोलन हो गया।

Delhi Police: टूलकिट को लेकर दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की तरफ से FIR किया गया। लेकिन पहले यह सूचना मिली की ग्रेटा थनबर्ग के खिलाप दिल्ली पुलिस ने यह FIR दर्ज की है। लेकिन दिल्ली पुलिस की तरफ से इसको लेकर प्रेस कांफ्रेंस की गई और बताया गया कि इस टूलकिट को लेकर अनाम लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। जिसकी जांच अब दिल्ली पुलिस की साइबर टीम करेगी। इस FIR में ग्रेटा थनबर्ग के नाम का जिक्र नहीं किया गया है।

भारतीय किसान संघ (Indian Farmers Organization)ने ऐसा अंदेशा प्रकट किया था कि यह आंदोलन मंदसोर जैसा हिंसक रूप लेगा, संभवत 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन जिन लोगों ने हिसंक होकर नंगा नाच किया, इसमें भारतीय किसान संघ की आशंका सही सिद्ध हुई। इसलिए भारतीय किसान संघ को 6 फरवरी को चक्का जाम में कोई अनहोनी नहीं हो जाए, इसकी आशंका है।

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) अपने विवादित बयानों की वजह से चर्चा में बनी रहती हैं। वो हर मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखती हैं। जब से देश में किसान आंदोलन की शुरुआत हुई है तब से वो लगातार इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देती रहती हैं।

पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) द्वारा किए गए एक ट्वीट के बाद वैश्विक स्तर पर हो रहे इस पूरे कैंपेन की कलई खुलती नजर आ रही है। कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने ट्वीट करके इस बारे में अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक्ट्रेस ने एक पत्रकार के ट्वीट को रीट्वीट किया है।

दिल्ली की सीमा पर केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों (Farmers Law) के खिलाफ प्रदर्शन (Farmer Protests) कर रहे किसान अड़े हुए हैं। ऐसे में सोमवार को किसान आंदोलन से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में सुनवाई हुई।

Farmers Law: राजस्थान (Rajasthan) के अलवर (Alwar) जिले में भी किसान सड़क घेरकर बैठे हैं। इसकी वजह से आम लोगों को ज्यादा परेशानी हो रही है। अलवर में किसानों ने विरोध प्रदर्शन (Farmers Protest) के क्रम में शाहजहांपुर हरियाणा बॉर्डर (Shahjahanpur Haryana Border) को जाम कर रखा है। इसको लेकर अब स्थानीय लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया है।

रवीश कुमार (Ravish Kumar) का अप्रेल 2015 का एक आलेख उनके चैनल की वेबसाइट पर उनकी कलम से लिखी और उनकी ही अपनी रिपोर्ट जब आप देखेंगे तो आपको समझ में आ जाएगा कि दूसरे मीडिया संस्थानों को गोदी मीडिया कहकर संबोधित करनेवाले कुमार कैसे अपना एजेंडा सरकार के खिलाफ कैसे चला रहे हैं। रवीश की 2014 से पहले और 2014 के बाद की रिपोर्ट देखकर आपको समझ में आ जाएगा की उनको सत्ता या सरकार से नहीं, उन्हें कृषि कानून के पास होने से नहीं, उन्हें सीएए के कानून बनने से नहीं, उन्हें तीन तलाक पर कानून बनाए जाने से नहीं, उन्हें घाटी से धारा 370 और 35 ए के हटाए जाने से नहीं बल्कि परेशानी नरेंद्र मोदी और सत्ता के सिंहासन पर उनके होने से परेशानी है।

Farmers Protest: कांग्रेस (Congress) नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार द्वारा बनाए गए 3 कृषि कानूनों का विरोध कर रही है और कह रही है कि इससे देश के किसानों को नुकसान होगा। ऐसे में वह किसानों के साथ खड़े हैं। जबकि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ये तक बोल चुके हैं कि किसान किसी भी हालत में आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। सरकार को अपने अंदर से ये बात निकाल देनी चाहिए की कृषि कानूनों को खारिज करने से कम पर किसान मानने वाले नहीं हैं। ऐसे में भाजपा की तरफ से वामदलों और कांग्रेस को इस आंदोलन में आग में घी डालने वाला बताया जा रहा है।