India china border dispute

आपको बता दें कि भारत सरकार ने फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 36 राफेल फाइटर जेट खरीदने का अनुबंध किया है। इस डील के तहत पहले चरण में भारतीय वायुसेना को 5 राफेल विमान मिल गए हैं जो 29 जुलाई को अंबाला पहुंचे थे।

भारत की पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी सहित कई इलाकों से चीनी सैनिक पीछे हटने को मजबूर तो हो गए, मगर अब अक्साई चिन में करीब 50 हजार PLA सैनिक तैनात कर दिए गए हैं। ऐसे में खतरे को भांपते हुए भारत ने भी तैयारी कर ली है।

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के बीच मोदी सरकार ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल किया, जिसके तहत फ्रांस से हैमर मिसाइलें मंगवाई गई हैं।

पूर्वी लद्दाख में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन में तनाव काफी बढ़ गया है। सीमा पर तनाव और कम करने के लिए भारत और चीन के बीच बुधवार को सैन्य स्तर की बातचीत हो सकती है।

सैन्य सूत्रों के अनुसार, भारतीय सेना रूसी सुखोई-30 लड़ाकू विमानों, मिग-29 जेट्स, इल्यूशिन-76 हेवी-लिफ्ट विमानों, एन-32 परिवहन विमानों, एमआई-17 यूटिलिटी हेलिकॉप्टरों के साथ चीन की किसी भी नापाक हरकत का जवाब देने के लिए तैयार है।

जापान के सीक्रेट कानून के दायरे में यह विस्तार पिछले महीने किया गया। इससे पहले जापान केवल अपने निकटतम सहयोगी अमेरिका के साथ ही डिफेंस इंटेलिजेंस साझा करता था, लेकिन अब इस सूची में भारत, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन भी शामिल हो गए हैं।

दरअसल एलएसी पर भारतीय सैनिकों के साथ उलझना चीन की कम्युनिस्ट सरकार के लिए बहुत भारी पड़ रहा है। एक तरफ जहां भारत सरकार ने जहां उसके खिलाफ आर्थिक मोर्चेबंदी शुरू कर दी है, वहीं उसे अपने देश के लोगों को भी गलवान घाटी की झड़प पर जवाब देते नहीं बन रहा है।

चीन का चेहरा अब धीरे धीरे दुनिया के सामने आ रहा है। चीन पर सीमा पर जोर जबरदस्ती, हांगकांग में अत्याचार, मानवाधिकार का उल्लंघन और कोरोना वायरस फैलाने का आरोप है। ऐसा लग रहा है अब चीन की इन हरकतों से पूरी दुनिया अब तंग आ चुकी है।

चीन के साथ सीमा पर जारी तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में तैनात सैनिकों से बातचीत करने के लिए वहां का दौरा कल करनेवाले थे।

वहीं भारत ने चीन के हर मूवमेंट पर निगाह रखी हुई है। जिनजियांग के इलाके में भारी वाहनों और हथियारों के मूवमेंट देखे जा रहे हैं।