Indian Culture

इस दिन प्रकृति के आधार के रूप में गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है और समाज के आधार के रूप में गाय की पूजा की जाती है। यह पूजा ब्रज से आरम्भ हुयी थी और धीरे धीरे पूरे भारत वर्ष में प्रचलित हुई।

आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण के बढ़ते खतरे के मद्देनजर पिछले साल दिवाली से पहले सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश में सिर्फ हरित पटाखे बेचने की अनुमति प्रदान की थी।

माथे के बीच में जहां तिलक लगाते हैं, वहां आज्ञाचक्र होता है। यह चक्र हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, जहां शरीर की प्रमुख तीन नाडि़यां इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना आकर मिलती हैं, इसलिए इसे त्रिवेणी या संगम भी कहा जाता है। यह गुरु स्थान कहलाता है। यहीं से पूरे शरीर का संचालन होता है। यही हमारी चेतना का मुख्य स्थान भी है। इसी को मन का घर भी कहा जाता है।

शनि अमावस्या के दिन श्री शनिदेव की आराधना करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस वर्ष यानि की आज 4 मई 2019 को (शनिवार) के दिन शनि अमावस्या मनाई जाएगी, यह पितृकार्येषु अमावस्या के रुप में भी जानी जाती है ।

भारतीय समाज में कुलदेवता या कुलदेवी का अपना अलग ही महत्व है। लोग भगवान के पूजन-अर्चना के अलावा विशेष कर अपने कुलदेवता या कुलदेवी की पूजा करते है।