indian tradition

महालक्ष्मी सदैव भगवान विष्णु की सेवा में लगी रहती हैं, शास्त्रों में जहां-जहां विष्णु और लक्ष्मी का उल्लेख आता है वहां लक्ष्मी श्री हरि के चरण दबाते हुए ही बताई गई हैं।

दिवाली की रात पीपल के नीचे तेल का दीपक ज़रूर जलाएं। यदि पीपल ना हो तो किसी चौराहे पर दीपक जला कर पीछे पलट कर मत देखें और चुपचाप अपने घर को लौट आएं।

मां भगवती सिद्धीदात्री को हर रोज भगवती का ध्यान करते हुए पीले पुष्प अर्पित करें। मोती चूर के लड्डूओं का भोग लगाएं ओर श्री विग्रह के सामने घी का दीपक जलाएं।

अरविंदर सिंह शास्त्री ने बताया कि महाकाली मां की उपासना करने से उनकी कृपा भक्तों पर सहज हो जाती है। मां कृपालु हैं इनकी शरण में आने वाला कोई खाली हाथ नहीं जाता। महाकाली जयंती के अवसर पर कहीं कहीं सुन्दर काण्ड के पाठ का भी आयोजन किया जाता है।

गौतम ने अपने बयान में कहा, "अगर आप सही मायने में अभिनय करना और खुद को परखना चाहते हैं, तो थियेटर आपके लिए अच्छा विकल्प है। आपके पास गलती करने की कोई गुंजाईश नहीं रहती है, क्योंकि आप लाइव ऑडियंस के सामने प्रदर्शन कर रहे होते हैं।"

शनि अमावस्या के दिन श्री शनिदेव की आराधना करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस वर्ष यानि की आज 4 मई 2019 को (शनिवार) के दिन शनि अमावस्या मनाई जाएगी, यह पितृकार्येषु अमावस्या के रुप में भी जानी जाती है ।

भारतीय समाज में कुलदेवता या कुलदेवी का अपना अलग ही महत्व है। लोग भगवान के पूजन-अर्चना के अलावा विशेष कर अपने कुलदेवता या कुलदेवी की पूजा करते है।

कहीं थाली में जूठन छोड़ना, आपको नुकसान तो नहीं पहुंचा रहा है। छोटी-छोटी गलतियां करने से हमारा दुर्भाग्य बढ़ता है और सौभाग्य कम होता है।

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सरस्वती की पूजा के दिन के रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों में ऐसी मान्यता है कि इसी दिन शब्दों की शक्ति ने मनुष्य के जीवन में प्रवेश किया था।

पद्मश्री और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता कथक नृत्यांगना शोभना नारायण युवाओं में कथक के प्रति आर्कषण को उम्मीद भरी नजरों से देखती हैं।