JNU

1969 में जेएनयू (JNU) की स्थापना कांग्रेस (Congress) और वामपंथ (leftist) के दुरभिसंधि काल में हुई थी। दोनों के बीच परस्पर अलगाव, अविश्वास, षड्यंत्र और संघर्ष का दौर समाप्त हो चुका था। कांग्रेस और वामपंथ में एक अघोषित और अलिखित परस्पर फायदे का समझौता हो चुका था। यह तय हुआ था कि केन्द्रीय सत्ता और राजनीति कांग्रेस के हाथ में होगी और कला, संस्कृति और बौद्धिक संस्थाओं से जुड़े सत्ता के केन्द्रों के सुविधाभोगी नियंता वामपंथी होंगे। सांस्कृतिक केंद्र वामपंथ की पाठशाला, कार्यशाला और प्रयोगशाला बन गए।

ABVP March: पदयात्रा के दौरान कोविड-19(Covid-19) गाइडलाइन्स को लागू किया गया। कैंपस में हुई हिंसा की घटना के खिलाफ आज विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में पदयात्रा में हिस्सा लेकर यह संदेश दिया कि वे हिंसा की राजनीति को सिरे से नकारते हैं।

JNU: जेएनयू (JNU) को लेकर विवाद थमता ही नहीं कि दूसरा विवाद शुरू हो जाता है। अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के कैंपस में स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) की प्रतिमा का अनावरण किया। अब इस विश्वविद्यालय का नाम 50 साल बाद बदलकर स्वामी विवेकानंद के नाम पर रखने की मांग उठने लगी है।

Narendra Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने आज जेएनयू में स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा (​​Swami Vivekananda's statue) का अनावरण किया इसके लिए पीएम मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम में शामिल हो चुके हैं।

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (Jawaharlal Nehru University) का प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam) का शेड्यूल आज जारी (Schedule Issued) कर दिया गया है। वहीं, एडमिट कार्ड (Admit Card) आज जारी होगा।

उमर खालिद(Umar Khalid) का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले 2016 में जेएनयू(JNU) में हुई कथित देशविरोधी नारेबाजी के मामले में उमर खालिद सबसे पहले सुर्खियों में आए थे।

'प्रज्ञानम् इंडिका’ फोरम 8-9 अगस्त को अंतरानुशासनिकता शोध पर दो दिवसीय राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी आयोजन करेगा। इस नेशनल सेमिनार में दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू, जामिया, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय आदि के छात्र सहभागिता करेंगे।

दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के एक छात्र पर देश विरोधी ट्वीट करने के चलते एफआईआर दर्ज की गई है। इससे एक बार फिर जेएनयू सुर्खियों में आ गया है।

एबीवीपी जेएनयू में कल 'भाषा संगम' की शुरुआत कर रहा है। इसके तहत देशभर के छात्रों को ऑनलाइन देश-विदेश की विभिन्न भाषाएं सिखाई जाएंगी।

'आपातकाल: लोकतंत्र की हत्या और पुनर्जन्म, न भूलेंगे न माफ करेंगे' नामक पुस्तक का संपादन जेएनयू के छात्र प्रशांत शाही ने किया है।