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ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी ही सरकार को घेरा, किसान ऋण माफी पर उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह के बारे में खबर है कि वह मध्यप्रदेश कांग्रेस में अपने गुट के कुछ विधायकों और मंत्रियों को लेकर खींचतान में जुटे हुए हैं। दिग्विजय सिंह की इस खींचतान से कमलनाथ और सिंधिया दोनों ही गुटों में असंतोष है।

दिग्विजय सिंह में हांगकांग का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वहां की लड़ाई युवा लड़ सकते हैं तो मध्यप्रदेश में युवा कमान क्यों नही संभाल सकते? उन्होंने अंतिम फैसला सोनिया गांधी के हाथ में होने की बात की।

मध्य प्रदेश में सिंधिया के समर्थकों ने कुछ पोस्टर लगाए हैं। जिनमें राहुल गांधी से अपील की गई है कि सिंधिया को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए। सिंधिया समर्थकों ने भोपाल में कांग्रेस ऑफिस के बाहर भी ये बैनर लगा दिए हैं। जिसके बाद अब अध्यक्ष पद को लेकर एक बार फिर सिंधिया के नाम की बहस तेज हो चुकी है।

यूपी की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस ने अपनी हार को लेकर मंथन किया। ये मंथन पश्चिमी यूपी के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगुआई में हुआ। हालांकि इसमें वो तमाम सीनियर कांग्रेसी नेता नदारद रहे, जिन्होंने चुनाव लड़ा था और हार का सामना करना पड़ा था।

प्रदेश प्रवक्ता अशोक सिंह ने बताया, प्रत्याशी चयन में स्थानीय संगठन की कोई राय नहीं ली जाती और प्रत्याशी ऊपर से थोप दिए जाते हैं। जमीन पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी होती है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताई अपनी हार की वजह

कांग्रेस आगामी दिनों में होने वाले नगर निकाय और पंचायत चुनाव के लिए ऐसे अध्यक्ष की तलाश है, जो पार्टी के नेताओं में समन्वय बना सके और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत कर सके।

मध्यप्रदेश की गुना सीट पर पहली बार सिंधिया परिवार के किसी सदस्य को हार का सामना करना पड़ा। यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ भाजपा के केपी यादव 1.25 लाख वोटों से जीते।

मध्य प्रदेश में एक तरफ कमलनाथ सरकार ये प्रचार करने में जुटी है कि किसानों का दो लाख रुपये तक का कर्जा माफ हुआ है लेकिन जब सिंधिया के सामने ही एक किसान ने उनके वायदों की पोल खोल दी।