KamalNath

इससे पहले, पिछले दिनों ही सिंधिया के प्रभाव वाले क्षेत्रों में शामिल श्योपुर, ग्वालियर ग्रामीण, विदिशा, सीहोर, शिवपुरी, गुना शहर, गुना ग्रामीण और होशंगाबाद के अध्यक्ष बदले गए थे।

मध्यप्रदेश में फ्लोर टेस्ट का आदेश होते ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रतिक्रिया सामने आई है। शिवराज सिंह चौहान ने तुरंत 'सत्यमेव जयते' लिखकर सुप्रीम आदेश का स्वागत किया। बीजेपी शुरू से ही फ्लोर टेस्ट की मांग कर रही है। उधर कांग्रेस इस बात पर अड़ी हुई थी कि पहले 22 विधायक बंगलुरू से वापिस लाये जाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में 20 मार्च को शाम 5 :30 बजे फ्लोर टेस्ट कराये जाने का आदेश दिया है। जहां विधासभा में कमलनाथ सरकार को बहुत साबित करना है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा है कि कल शाम 5 :30 बजे तक हर हाल में फ्लोर टेस्ट किया जायेगा और इसकी प्रक्रिया की पूरी वीडियोग्राफी किये जाने का आदेश भी दिया गया है।

एक तरफ जहां कमलनाथ को अपनी कुर्सी बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है तो वहीं दूसरी तरफ MP के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हाथ में बल्ला लेकर चौके-छक्के जड़ते नजर आए।

बेंगलुरु में मध्य प्रदेश कांग्रेस के बागी विधायकों से मिलने पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को कर्नाटक हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। बता दें बुधवार को दिग्विजय ने बेंगलुरु में कांग्रेस के बागी विधायकों से मिलने से रोके जाने के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की याचिका पर बुधवार तक जवाब मांगा है, जो (शिवराज) विधानसभा में फौरन फ्लोर टेस्ट कराने की मांग कर रहे हैं।

बीजेपी ने पार्टी विधायकों को व्हिप जारी कर पार्टी के पक्ष में वोट डालने को कहा है। लगातार बदल रहे घटनाक्रम को देखते हुए जयपुर से भोपाल लाए गए सभी कांग्रेस विधायकों को एक साथ रखा जायेगा।

कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक 22 विधायक बेंगलुरु में हैं। इनमें 6 मंत्री भी थे। इन सभी 22 विधायकों ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

इन बागी विधायकों में से 6 विधायक को 13 मार्च को स्पीकर एनपी प्रजापति से मुलाकात करनी थी। विधायकों के न आने पर प्रजापति ने कहा कि उन्होंने 3 घंटे तक विधायकों का इंतजार किया, लेकिन कोई नहीं आया।

मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार की स्थितियां लगातार खराब होती जा रही हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ पूरी ताकत से सरकार बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं मगर कोई न कोई पेच खिसकता ही जा रहा है।