Lok Sabha

गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को अनुच्छेद 370 को हटाने वाले विधेयक को लोकसभा में पेश किया। अमित शाह ने संकल्प पेश करते हुए कहा कि भारत के राष्ट्रपति यह घोषणा करते है उनके आदेश के बाद अनुच्छेद 370 के सभी प्रावधान जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होंगे।

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म करने के संकल्प के सोमवार को राज्यसभा में पारित होने के बाद मंगलवार को राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने कहा कि कश्मीर में हिंसा की कोई घटना नहीं घटी और स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण है।

यह याचिका अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता शाहिद अली ने दायर की है। इस जनहित याचिका में इस अधिनियम की धारा 3 और 4 को रद्द करने की मांग की गई।

उन्होंने सदस्यों से डिजिटल तकनीकी अपनाने की बात कही। शून्य काल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने सांसदों से कहा कि प्रक्रिया को 'वैकल्पिक आधार' पर अगले सत्र से शुरू किया जाएगा।

लोकसभा में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल पारित होने के बाद देशभर में डॉक्टर्स का विरोध बढ़ता जा रहा है। दिल्ली के रेजिडेंट डॉक्‍टर इसके खिलाफ आज हड़ताल पर रहेंगे। डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से मरीजों को दिक्कतों का सामना कर पड़ सकता है।

बता दें कि तीन तलाक बिल संसद के दोनों सदनों से पहले ही पास हो चुका है। मोदी सरकार ने इस बिल को 25 जुलाई को लोकसभा में और 30 जुलाई को राज्यसभा में पास करवाया था।

उन्नाव रेप केस को लेकर मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने इस मामले में गृह मंत्री अमित से जवाब देने की मांग की है। कांग्रेस की इस मांग का कई विपक्षी पार्टियों ने समर्थन किया।

आजम खान ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मेरा पद (लोकसभा अध्यक्ष के पद पर आसीन) के प्रति ऐसा कहने का कोई इरादा नहीं था..पूरा सदन मेरे भाषण और आचरण को जानता है। इसके बावजूद यदि उन्हें लगता है कि मैंने कुछ गलत किया है, तो मैं इसके लिए माफी मांगता हूं।"

इस मुद्दे पर लोकसभा की पूर्व स्पीकर सुमित्रा महाजन का भी बयान आया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने (आजम खान) समूचे सदन का अनादर किया है।

लोकसभा में गुरुवार को ट्रिपल तलाक बिल पेश कर दिया गया है। बिल पर चर्चा करते हुए कानून मंत्री रविशकंर प्रसाद ने ट्रिपल तलाक बिल पर लोकसभा में कहा, "ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 24 जुलाई, 2019 तक ट्रिपल तलाक के 345 मामले सामने आ चुके हैं।' साथ ही उन्होंने कहा कि यह इंसाफ और इंसानियत का मामला है, हमें मुस्लिम बहनों की चिंता है।