maharashtra cabinet

उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर 2019 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। संविधान के तहत उन्हें 28 मई 2020 तक किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है। कोरोनावायरस महामारी के कारण हालांकि सभी चुनाव स्थगित हैं ऐसे में राज्य मंत्रिमंडल ने 9 अप्रैल को उन्हें राज्यपाल कोटे से विधान परिषद में नामित किए जाने की सिफारिश की थी।

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महा अघाड़ी सरकार के गठन के करीब एक महीने के बाद आज पहला कैबिनेट विस्तार होगा। महाराष्ट्र में कुल 36 मंत्री शपथ लेने वाले हैं। इनमें 25 कैबिनेट मंत्री होंगे, जबकि 10 राज्य मंत्री होंगे।

महाराष्ट्र में शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी को एकसाथ मिलाने के पीछे सबसे बड़ी भूमिका शरद पवार की ही रही है। लेकिन जब महाराष्ट्र में सत्ता के बंटवारे पर उनसे सवाल हुआ तो उन्होंने कहा कि शिवसेना के पास मुख्यमंत्री है जबकि कांग्रेस के पास स्पीकर है।

साल 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अजित पवार एक अहम चेहरा बनकर सामने आए हैं। बीजेपी के खेमे में घुसकर एनसीपी में घरवापसी कर चुके अजित पवार के काम बार बार आशंका पैदा कर रहे हैं।

चार तटस्थ विधायकों में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के विधायक राजू पाटिल का भी नाम शामिल है। गौरतलब है कि, शिवाजी पार्क में आयोजित उद्धव ठाकरे की शपथ ग्रहण समारोह में भाई राज ठाकरे भी पहुंचे थे।

फडणवीस ने कहा कि, जिस तरह से शपथ ली गई उस पर भी मुझे आपत्ति है। जिसके बाद स्पीकर ने कहा कि सदन के बाहर क्या हुआ उस पर बात नहीं करनी चाहिए। उसके बाद फडणवीस ने कहा कि मुझे संविधान पर बात करने का अधिकार है।

भाजपा अभी भी रेस से बाहर नहीं है और विधानसभा स्पीकर पद के लिए भाजपा ने अपना उम्मीदवार उतार दिया है। जहां कांग्रेस ने नाना पटोले को अपना उम्मीदवार बनाया है। तो वहीं भाजपा ने किसन कथोरे को अपना प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा है।

महाराष्ट्र की सियासत में मची भारी उथलपुथल के बीच दो आपस मे बिछड़े टूटे परिवार अब एक होने की राह पर हैं। अजित पवार की वापसी के बाद अब ठाकरे सरकार के बीच भी सुलह की कोशिश की जा रही है।

उद्धव सरकार शनिवार को दोपहर 2 बजे बहुमत परीक्षण करेगी। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने बहुमत साबित करने के लिए उद्धव ठाकरे को 3 दिसंबर तक का वक्त दिया था।

ठाकरे परिवार से आने वाले महाराष्ट्र के पहले सीएम के तौर पर उद्धव ने शपथ ले ली है, लेकिन उनके लिए सरकार चलाने से ज्यादा बड़ी चुनौती त्रिपक्षीय गठबंधन को साधे रखना होगा। एनसीपी और कांग्रेस को साधना उनके लिए एक चुनौती होगा।