mind

मन अप्रत्यक्ष है। दिखाई नहीं पड़ता। यह मनुष्य के व्यक्तित्व की अंतः शक्ति है। मन के अध्ययन, विवेचन व विश्लेषण पर विश्वव्यापी मनोविज्ञान विकसित हुआ है। भारतीय दर्शन में मनः शक्ति की जानकारी ऋग्वेद के रचनाकाल से ही मिलती है। ऋग्वेद में मन भी एक देवता हैं।

प्रत्येक व्यक्ति का मन होता है। सामूहिक जीवन के प्रभाव में समान मन के कारण समाज का भी मन होता है। तब व्यक्तिगत मन सामूहिक मन का भाग हो जाता है।

आम तौर पर जो नगीने अंगूठी और लॉकेट में ज्योतिषीय सलाह के अनुसार पहने जाते हैं ,उसे रत्न कहते हैं...