Mythology

रक्षाबंधन के संबंध में भी कई रोचक कहानियां हैं, लेकिन सबसे ज्यादा प्रचलित कहानी भाई-बंधन के स्नेह और विश्वास का पर्व है।

गीता ने सारी दुनिया को प्रभावित किया। इसका प्रभाव चीन और जापान तक पड़ा। ‘जर्मन धर्म’ के अधिकृत भाष्यकार जे0डब्लू0 होअर ने गीता का महत्वपूर्ण उल्लेख किया। होअर ने लिखा, “यह सब कालों में सब प्रकार के धार्मिक जीवन के लिए प्रामाणिक है।

भारत की देव आस्था निराली हैं, यहां प्रत्येक ग्राम के देवता हैं, कुल देवता हैं, क्षेत्र देवता हैं और वन देवता भी हैं। वैदिक काल के देवता वेदों में हैं। उत्तरवैदिक काल व पुराण काल में भी वैदिक देवों की उपासना व स्तुतियां थीं लेकिन तमाम नए देवनाम भी जुड़े। तैत्तिरीय उपनिषद् में ‘आचार्य देवता है - आचार्य देवो भव। माता पिता भी देवता है - मातृ देवो भव, पितृ देवो भव।

राहु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु शनिवार का दिन, राहु के नक्षत्र (आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा) तथा शनि की होरा में अधिक शुभ होते है।

सीता ने तीनों गवाहों द्वारा झूठ बोलने पर उनको क्रोधित होकर श्राप दिया की फल्गु नदी जा तू सिर्फ नाम की रहेगी, तुझमें पानी नहीं रहेगा इसलिए फल्गु नदी गया में आज भी सुखी ही रहती है। गाय को कहा तू पूज्य होकर भी लोगों का झूठा खाएगी और केतकी के फूलों को श्राप दिया कि तुझे पूजा में कभी चढ़ाया नही जाएगा।

मृत्यु जितना शाश्वत सच है, शास्त्र और पुराण भी उतना ही सत्य है। हम यही संस्कार अपनी पीढ़ी को स्थानांतरित कर रहे हैं।

जब मृत व्यक्ति के अधूरे कार्य पूरे नहीं किए जाते तो उसकी आत्मा परिवार पर अप्रत्यक्ष रुप से कार्यों को पूरा करने के लिए दबाब डालती है। जिसके कारण परिवार में कई बार अशुभ घटनाएं घटित होती हैं। यही पितृदोष होता है।

हाथी का कान सूप जैसा मोटा होता है। गणेश जी को बुद्धि का अनुष्ठाता देव माना गया है।  मनुष्य के अंदर लोभ को अंत करने के लिए गणेश जी के इस रूप की पूजा विशेष फलदायी होती है। कर्क राशि के व्यक्तियों को गणेश जी के इस अवतार की पूजा करनी चाहिए।

माता पिता के प्रति भावपरक ऋद्धा का अपना समाज विज्ञान है। माता पिता बचपन में पोषण देते हैं, पढ़ाते हैं सिखाते हैं। वे स्वयं की चिन्ता नहीं करते अपना भविष्य नहीं देखते। हम सबके सुखद भविष्य का तानाबाना बुनते हैं।  हम तरूण होते हैं, पिता वृद्ध होते हैं। हम तरूणाई से और परिपक्व होते हैं, पिता और वृद्ध होते हैं। जब हम तेज रफ्तार जीवन की गतिशीलता में होते हैं, तब माता पिता उठते हीं गिर पड़ते हैं। वे बचपन में हमको गिरने से बचाते थे।

अरविंदर सिंह शास्त्री ने बताया कि महाकाली मां की उपासना करने से उनकी कृपा भक्तों पर सहज हो जाती है। मां कृपालु हैं इनकी शरण में आने वाला कोई खाली हाथ नहीं जाता। महाकाली जयंती के अवसर पर कहीं कहीं सुन्दर काण्ड के पाठ का भी आयोजन किया जाता है।