Mythology

सीता ने तीनों गवाहों द्वारा झूठ बोलने पर उनको क्रोधित होकर श्राप दिया की फल्गु नदी जा तू सिर्फ नाम की रहेगी, तुझमें पानी नहीं रहेगा इसलिए फल्गु नदी गया में आज भी सुखी ही रहती है। गाय को कहा तू पूज्य होकर भी लोगों का झूठा खाएगी और केतकी के फूलों को श्राप दिया कि तुझे पूजा में कभी चढ़ाया नही जाएगा।

मृत्यु जितना शाश्वत सच है, शास्त्र और पुराण भी उतना ही सत्य है। हम यही संस्कार अपनी पीढ़ी को स्थानांतरित कर रहे हैं।

जब मृत व्यक्ति के अधूरे कार्य पूरे नहीं किए जाते तो उसकी आत्मा परिवार पर अप्रत्यक्ष रुप से कार्यों को पूरा करने के लिए दबाब डालती है। जिसके कारण परिवार में कई बार अशुभ घटनाएं घटित होती हैं। यही पितृदोष होता है।

हाथी का कान सूप जैसा मोटा होता है। गणेश जी को बुद्धि का अनुष्ठाता देव माना गया है।  मनुष्य के अंदर लोभ को अंत करने के लिए गणेश जी के इस रूप की पूजा विशेष फलदायी होती है। कर्क राशि के व्यक्तियों को गणेश जी के इस अवतार की पूजा करनी चाहिए।

माता पिता के प्रति भावपरक ऋद्धा का अपना समाज विज्ञान है। माता पिता बचपन में पोषण देते हैं, पढ़ाते हैं सिखाते हैं। वे स्वयं की चिन्ता नहीं करते अपना भविष्य नहीं देखते। हम सबके सुखद भविष्य का तानाबाना बुनते हैं।  हम तरूण होते हैं, पिता वृद्ध होते हैं। हम तरूणाई से और परिपक्व होते हैं, पिता और वृद्ध होते हैं। जब हम तेज रफ्तार जीवन की गतिशीलता में होते हैं, तब माता पिता उठते हीं गिर पड़ते हैं। वे बचपन में हमको गिरने से बचाते थे।

अरविंदर सिंह शास्त्री ने बताया कि महाकाली मां की उपासना करने से उनकी कृपा भक्तों पर सहज हो जाती है। मां कृपालु हैं इनकी शरण में आने वाला कोई खाली हाथ नहीं जाता। महाकाली जयंती के अवसर पर कहीं कहीं सुन्दर काण्ड के पाठ का भी आयोजन किया जाता है।

हर घर की एक कुलदेवी होती हैं। आज भारत में 70% परिवार अपने कुलदेवी को नहीं जानते। कुछ परिवार बहुत पीढ़ियों से कुलदेवी का नाम तक नहीं जानते।

भारतीय समाज में कुलदेवता या कुलदेवी का अपना अलग ही महत्व है। लोग भगवान के पूजन-अर्चना के अलावा विशेष कर अपने कुलदेवता या कुलदेवी की पूजा करते है।