nature

पूर्वज अनुभूति में पृथ्वी सजीव है। यह निर्जीव नहीं है। लाखों जीवों की धारक है। इसी में उगना उदय और अस्त होना प्रत्येक प्राणी की नियति है। यह जननी है। पृथ्वी को माता कहने वाले यह ऋषि अंधविश्वासी नहीं हैं।

जीवन दिक्काल में है। कभी-कभी काल का अतिक्रमण भी करता है जीवन, इसलिए जीवन की कालगणना सतही है। कालगणित के पैमाने पर कोई 100 वर्ष जीता है तो कोई 25 या 30 बरस। कीट पतंगे कम समय का जीवन पाते हैं। सर्प आदि की उम्र बहुत ज्यादा होती है। ऋग्वेद के पूर्वजों ने 100 शरद् जीवन की स्तुतियां की थी- जीवेम शरदं शतं। अनुवाद में गड़बड़ हुई। 100 शरद का अर्थ 100 वर्ष हो गया। शरद् में गहन आनंदबोध है।

क्या आपको पता है प्रयागराज कुम्भ में झारखण्ड पवेलियन प्रदर्शित कर रहा है प्रदेश की संस्कृति, आस्था और प्राकृतिक सौन्दर्य की झलक। जी हां विश्व में आस्था का सबसे बड़ा समारोह प्रयागराज कुम्भ अपने चिर परिचित अंदाज में आयोजित हो रहा है।

किसी भी जातक की जन्म कुंडली में ग्रहों की बनती-बिगड़ती स्थिति इंसान को अहंकारी बनाती है तो आइए हम आपको...

नई दिल्ली। कालद्रव्य बदल गया है। समय भी प्रदूषण का शिकार है। दिमाग भी स्वस्थ नहीं। मन और आत्म द्रव्य...