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कंगना रनौत (Kangana Ranaut) को शिवसेना (Shivsena) की तरफ से जमकर धमकी दी जाने लगी है। शिवसेना समेत सभी साथी दल के नेता एक-एक कर कंगना पर जुबानी वार कर रहे हैं।

महाराष्ट्र (Maharashtra) में राजनीतिक सरगर्मी तेज है। सरकार के खिलाफ फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने आवाज उठाई तो उसके नए नवेले दफ्तर पर बीएमसी (BMC) का बुलडोजर चल गया।

महाराष्ट्र में शिवसेना नीत महाराष्ट्र विकास आघाडी सरकार में तनाव के संकेत दिख रहे हैं, जहां गठबंधन की तीन सहयोगियों में से एक कांग्रेस, प्रमुख निर्णय लेने की प्रक्रिया और महत्वपूर्ण बैठकों में खुद को शामिल कराने का प्रयास कर रही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक ट्रेडोस अदनोम घेब्रेयसुस ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नोवेल कोरोना वायरस निमोनिया के प्रति विश्व स्वास्थ्य संगठन की समझ गहन हो रही है। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस व मौसमी फ्लू के बीच चार फर्क होते हैं।

महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की जबसे सरकार बनी है, तभी से तीनों पार्टियों के बीच मतभेद की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। अब एक बार फिर महाराष्ट्र में महाविकास अगाड़ी गठबंधन में अनबन की सुगबुगाहट तेज है।

राजनीतिक रूप से शरद पवार और अजीत पवार के बीच मतभेद कई बार उजागर हो चुके हैं। वहीं अब सीएए और एनपीआर की आग महाराष्ट्र में अजित पवार और शरद पवार के बीच दिखने लगी है। जहां एक तरफ तो अजित पवार नागरिकता कानून का खुलकर समर्थन कर रहे हैं।

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में मुस्लिमों को 5 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि जल्द ही इसे विधानसभा से पारित किया जाएगा।

देशभर में चल रहे नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बीच महाराष्ट्र सरकार की ओर से ये कहा गया था कि वह इस कानून के खिलाफ विधानसभा में बिल नहीं लाएगी। लेकिन अब महाराष्ट्र सरकार में मुस्लिमों के लिए आरक्षण की चर्चा जोरो पर है।

उन्होंने लिखा कि उनके कहने पर राहुल गांधी ने वादा किया था कि मुंबई के लोगों को एसआरए और सरकार की अन्य योजनाओं के तहत 500 स्क्वायर फीट का घर दिया जाएगा। इस वादे को पूरा किया जाए।

दरअसल शिवसेना अपने गठबंधन के चक्कर में फंस चुकी है। गठबंधन में शामिल कांग्रेस और एनसीपी जैसे दल सेकुलरिज्म के नाम पर हिंदू धर्म के प्रतीकों से दूरी बनाते आए हैं।