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चार तटस्थ विधायकों में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के विधायक राजू पाटिल का भी नाम शामिल है। गौरतलब है कि, शिवाजी पार्क में आयोजित उद्धव ठाकरे की शपथ ग्रहण समारोह में भाई राज ठाकरे भी पहुंचे थे।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में बनी महाविकास अघाड़ी सरकार ने महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत हासिल कर लिया है। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान भाजपा के सदस्यों ने सदन का बहिष्कार किया। जिसके बाद सदस्यों की गिनती कर बहुमत परीक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई। सभी सदस्यों ने अपनी सीट पर उठकर नाम और क्रमांक बताया।

फडणवीस ने कहा कि, जिस तरह से शपथ ली गई उस पर भी मुझे आपत्ति है। जिसके बाद स्पीकर ने कहा कि सदन के बाहर क्या हुआ उस पर बात नहीं करनी चाहिए। उसके बाद फडणवीस ने कहा कि मुझे संविधान पर बात करने का अधिकार है।

भाजपा अभी भी रेस से बाहर नहीं है और विधानसभा स्पीकर पद के लिए भाजपा ने अपना उम्मीदवार उतार दिया है। जहां कांग्रेस ने नाना पटोले को अपना उम्मीदवार बनाया है। तो वहीं भाजपा ने किसन कथोरे को अपना प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा है।

अजित पवार अपनी गतिविधियों से राजनीतिक पंडितों को हैरान कर रहे हैं। इस मुलाकात को लेकर प्रदेश के सियासी गलियारों में अटकलबाजियों का दौर एक बार फिर से शुरू हो गया है। हालांकि सफाई देते हुए अजित पवार ने इसे शिष्‍टाचार भेंट बताया।

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में बनी सरकार की मुश्किलें हर गुजरते दिन के साथ बढ़ रही है। शनिवार को बहुमत साबित करने से पहले डिप्टी सीएम और स्पीकर के पद को लेकर कांग्रेस-एनसीपी में रस्साकशी शुरू हो गई है।

महाराष्ट्र की सियासत में मची भारी उथलपुथल के बीच दो आपस मे बिछड़े टूटे परिवार अब एक होने की राह पर हैं। अजित पवार की वापसी के बाद अब ठाकरे सरकार के बीच भी सुलह की कोशिश की जा रही है।

उद्धव सरकार शनिवार को दोपहर 2 बजे बहुमत परीक्षण करेगी। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने बहुमत साबित करने के लिए उद्धव ठाकरे को 3 दिसंबर तक का वक्त दिया था।

सूत्रों का कहना है कि इन दोनों मांगों को मानने के लिए शरद पवार ने भाजपा और मोदी-शाह को संदेश भेजकर विचार के लिए वक्त दिया था। यही वजह है कि नतीजे आने के बाद पवार ने भाजपा नेतृत्व के खिलाफ ऐसा कुछ तीखा नहीं बोला था

ठाकरे परिवार से आने वाले महाराष्ट्र के पहले सीएम के तौर पर उद्धव ने शपथ ले ली है, लेकिन उनके लिए सरकार चलाने से ज्यादा बड़ी चुनौती त्रिपक्षीय गठबंधन को साधे रखना होगा। एनसीपी और कांग्रेस को साधना उनके लिए एक चुनौती होगा।