NDA

झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गयी हैं। दो सीटों को लेकर 19 जून को होने वाले चुनाव में यूपीए-एनडीए दोनों अपने-अपने वोटरों की घेराबंदी में जुटे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर यूपीए विधायक दल की बैठक 17 जून को बुलायी गयी है।

देश के इतिहास में यह पहला मौका था, जब किसी गैर कांग्रेसी पार्टी ने अपने दम पर तीन सौ से ज्यादा सीटें जीती। वहीं जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद नरेंद्र मोदी तीसरे शख्स बने, जो लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में पहुंचे।

बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में अभी सात से आठ महीने का समय बाकी है, मगर सभी राजनीतिक पार्टियां अभी से 'चुनावी मोड' में आ गई हैं। ये पार्टियां चुनावी पिच का मुआयना करने के लिए अपने दिग्गज खिलाड़ियों को मैदान में उतार रही हैं।

दिल्ली के साथ ही भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) पिछले दो साल में छह राज्यों में सत्ता गंवा चुका है। पिछली बार दिल्ली में महज 3 सीटें जीतने वाली भाजपा को इस बार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर जमकर निशाना साधा। दिल्ली के संगम विहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की साझा रैली को संबोधित करते हुए नीतीश ने दिल्ली सरकार से सवाल किया कि पांच साल में क्या किया?

प्रधानमंत्री का बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष इस मुद्दे पर आक्रमक है। विपक्ष ने इस मुद्दे को संसद में भी उठाने का मन बनाया है।

सर्वे के मुताबिक, 56.4 फीसदी लोगों ने कहा कि वे मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार से बहुत अधिक संतुष्ट हैं, 23.8 फीसदी ने कहा कि वे 'कुछ हद तक संतुष्ट' हैं और सिर्फ 19.8 फीसदी ने कहा कि वे 'संतुष्ट नहीं' हैं। पूर्वोत्तर जोरदार तरीके से भाजपा का बना हुआ है।

कांग्रेस और असदुद्दीन ओवैसी समेत कई दल मोदी सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि वो एनपीआर के जरिए पिछले दरवाजे से एनआरसी लागू करना चाह रही है।

देश भर में नागरिकता कानून पर मचे बवाल के बीच सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने पर विचार शुरू कर दिया है। इस सिलसिले में नीति आयोग शुक्रवार को जनसंख्या नियंत्रण पर एक महत्वपूर्ण बैठक कर रहा है।

लोकसभा और राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पर मोदी सरकार को साथ देने के बाद जदयू प्रमुख नीतीश कुमार के रुख राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण(NRC) के मुद्दे पर बदल गए हैं।