Nirabhya Case

अपने स्थानांतरण से पहले वह निर्भया दुष्कर्म और हत्या का मामला सुन रहे थे। वह निर्भया के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, ताकि चारों दोषियों को फांसी की सजा देने का निर्देश दिया जा सके।

इंदिरा जयसिंह के इस बयान पर निर्भया की मां आशा देवी ने भी अपना गुस्सा निकाला है। उन्होंने भड़कते हुए कहा कि, आखिर ऐसा बोलने वाली वो होती कौन हैं। आशा देवी ने इंदिरा जयसिंह को लेकर कहा कि, ‘वे सुप्रीम कोर्ट में उनसे कई बार मिलीं, लेकिन उन्होंने एक बार भी उनका हाल-चाल नहीं पूछा। आज वो दोषियों के हक में बोल रही हैं। आशा देवी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे लोग बलात्कारियों को सपोर्ट कर अपनी रोजी रोटी चलाते हैं, इसलिए पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिलता है। इस तरह का सुझाव देने की उनकी हिम्मत कैसे हुई?’

पहले वकील इंदिरा जयसिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि, ‘मैं आशा देवी का दर्द पूरी तरह से समझती हूं। फिर भी मैं उनसे अपील करती हूं कि वह सोनिया गांधी के उदाहरण का अनुसरण करें।

नया डेथ वारंट जारी होने के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि जब तक दोषियों को फांसी पर नहीं लटका दिया जाता है, तब तक मेरी बेटी को न्याय नहीं मिलेगा। मुझको पिछले सात साल से तारीख पर तारीख दी जा रही है। उन्होंने कहा कि हर जगह निर्भया के गुनहगारों का ही मानवाधिकार देखा जा रहा है। हमारा मानवाधिकार कोई नहीं देख रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि AAP के वकील ने कोर्ट में कहा कि वर्तमान में रेपिस्ट को फांसी देने में देरी होगी। इतना नहीं दिल्ली सरकार ने इस मामले में नाबालिग आरोपी की रिहाई पर उसे दस हजार रुपये और सिलाई मशीन दी।