Nizamuddin Markaz

दिल्ली की एक अदालत ने मार्च में निजामुद्दीन मरकज में जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए आठ अलग-अलग देशों के 76 विदेशी जमातियों को जमानत दे दी है।

भले ही दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच दो महीने बाद भी निजामुद्दीन मरकज तबलीगी कांड के मुख्य आरोपी मौलाना मो. साद पर हाथ नहीं डाल पायी हो, मगर वो अदालत में चार्जशीटें धुंआधार तरीके से भरने में लगी है। अब आज यानि गुरुवार को दिल्ली पुलिस 12 और नई चार्जशीट दाखिल करने जा रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने देश में कोरोना के बढ़ते आंकड़ों पर बयान जारी किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भारत को तब सबसे बड़ा झटका लगा जब निजामुद्दीन मरकज से जुड़े मामले सामने आए।

क्राइम ब्रांच के सूत्रों के मुताबिक तबलीगी जमात में मौलाना साद के अलावा इन पांचों आरोपियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। मरकज से जुड़ा कोई भी फैसला हो, मौलाना साद इनको उसमें जरूर शामिल करता था।

सूत्रों के मुताबिक, याचिका में कहा गया है कि तबलीगी जमात के 3300 सदस्यों को 40 दिनों से अलग-अलग क्वारंटाइन केंद्रों में रखा गया है। इनकी कोविड-19 की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी इन्हें जाने नहीं दिया गया। इसमें 14 दिनों के क्वारंटाइन के दिशानिर्देश का पालन करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने को कहा गया है।

क्राइम ब्रांच की टीम ने सईद से ऐसे करीब 20 लोगों की डिटेल्स मांगी है जो मरकज में आने-जाने वाले लोगों और वहां की पूरी व्यवस्था का जिम्मा संभालते हैं। यूं तो मौलाना साद के तीन बेटे हैं पर सईद मरकज से जुड़े कामों में सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है। क्राइम ब्रांच को उससे पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। 

पुलिस के अनुसार 12 विदेशी नागरिक टूरिस्ट वीजा लेकर शामली पहुंचे थे, लेकिन धर्म का प्रचार कर रहे थे। जबकि 3 लोग असम के रहने वाले थे। पूरा मामला जिले के थाना भवन थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार 15 लोगो की जमात भैसानी इस्लामपुर गांव की मक्का मस्जिद में बाहर से आकर रुकी थी। इनमें 12 बांग्लादेशी थे, जो टूरिस्ट वीजा लेकर शामली पहुंचे थे।

इससे पहले भी शामली जनपद में मौलाना साद के कस्बा कांधला में स्थित फार्म हाउस पर पुलिस और खुफिया विभाग की टीम पहुंची थी। टीम ने फार्म हाउस में पहुंचकर वहां काम करने वाले लोगों से जानकारी ली थी और देखा था कि वहां कोई जमाती तो नहीं है। इस दौरान किसी अन्य व्यक्ति को अंदर नहीं जाने दिया गया। 

कोविड-19 के सामुदायिक प्रसारण को रोकने के लिए इंटेलिजेंस एजेंसी ने उन लोगों की एक जिलेवार सूची वितरित की जो धार्मिक सभा के दौरान निजामुद्दीन में और उसके आसपास के इलाके में स्पॉट किए गए थे। इसके बाद 30 मार्च तक संबंधित जिलों के पुलिस अधिकारियों को हजारों नाम, मोबाइल नंबर और पते वाली सूचियां भेजी गई थीं।

खुफिया विभाग की जांच में सामने आया कि हरियाणा में 1277 तबलीगी जमातियों ने एंट्री की है। ये सभी अलग-अलग जिलों की मस्जिदों में ठहरे थे। इस जानकारी के बाद हरियाणा की पुलिस अलर्ट हो गई।