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पेट्रोल और डीजल के दाम में सोमवार को कोई बदलाव नहीं हुआ, लेकिन कच्चे तेल में करीब तीन फीसदी की गिरावट आई। चीन में कोरोनावायरस का प्रकोप गहराने और इसका प्रभाव दूसरे देशों पर भी होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास को लेकर बनी चिंता के कारण कच्चे तेल के दाम में गिरावट आई है।

पेट्रोल के दाम में रविवार को लगातार दूसरे दिन वृद्धि हुई जिसके बाद देश की राजधानी दिल्ली में फिर पेट्रोल का भाव 72 रुपये लीटर से ज्यादा हो गया है। वहीं, डीजल की कीमत में भी करीब छह सप्ताह में पहली बार इजाफा हुआ है।

लीबिया से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने के चलते तेल की कीमतों में तेजी का सिलसिला गुरुवार को जारी रहा। बीते 10 फरवरी के बाद से कच्चे तेल के दाम में तेजी का रूख बना हुआ है और इन दस दिनों में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का भाव करीब छह डॉलर प्रति बैरल बढ़ गया है।

पेट्रोल और डीजल के दाम में मंगलवार को लगातार छठे दिन गिरावट का सिलसिला जारी रहा। पेट्रोल का भाव फिर दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 16 पैसे जबकि चेन्नई में 17 पैसे प्रति लीटर सस्ता हो गया है।

पेट्रोल और डीजल के दाम में लगातार पांचवें दिन सोमवार को गिरावट का सिलसिला जारी रहा। पेट्रोल का भाव फिर दिल्ली और मुंबई में 13 पैसे जबकि कोलकाता में 18 पैसे और चेन्नई में 14 पैसे प्रति लीटर सस्ता हो गया है।

तेल विपणन कंपनियों ने मंगलवार को पेट्रोल के दाम में दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में छह पैसे प्रति लीटर की कटौती की। वहीं, डीजल का दाम चारों महानगरों में पांच पैसे प्रति लीटर कम हो गया है।

पेट्रोल और डीजल के दाम में लगातार छठे दिन गिरावट दर्ज की गई है। तेल विपणन कंपनियों ने मंगलवार को दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में पेट्रोल के दाम में 16 पैसे जबकि चेन्नई में 17 पैसे प्रति लीटर की कटौती की।

पेट्रोल और डीजल के दाम में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट का सिलसिला जारी रहा। लगातार दो दिनों में देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल और डीजल 29 पैसे प्रति लीटर सस्ते हो गए हैं।

पेट्रोल और डीजल के दाम में फिर उपभोक्ताओं को राहत मिली है। तेल विपणन कंपनियों ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल के दाम में कटौती की।

पेट्रोल और डीजल के दाम में बुधवार को कोई बदलाव नहीं हुआ। उधर, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी बनी हुई थी। अमेरिका और चीन के बीच होने वाले पहले चरण के ट्रेड डील से तेल की वैश्विक मांग में कोई खास बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं की जा रही है