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कर छूट का लाभ लेने के बाद अगर पूरी रकम नहीं निवेश करते हैं तो आनुपातिक आधार पर बाकी रकम पर टैक्स लगेगा। एक मकान को बेच दूसरा खरीद कर टैक्स छूट लेने के बाद तीन साल के भीतर ही उसे दोबारा बेच देते हैं तो यह लाभ वापस हो जाता है।

NAREDCO के इस कार्यक्रम में रियल स्टेट और फाइनेंस से जुड़े नामचीन व्यक्तियों ने भाग लिया, जिन्होंने इस क्षेत्र की मजबूती, तेज विकास और देश के विकास में भागीदार निभाने के लिए सुझाव पेश किये।

पीठ ने कहा कि केवल वास्तविक घर खरीदार ही बिल्डर के खिलाफ दिवाला कार्यवाही का अनुरोध कर सकते हैं। पीठ ने केंद्र से कहा कि वह सुधारात्मक कदम उठाते हुए शपथपत्र दायर करें।

घर खरीदने से पहले लोगों को आसानी हो, इसके लिए पहले पूरे देश में रेरा के चार रीजनल प्लेटफॉर्म बनाए गए थे, लेकिन अब एक प्लेटफॉर्म बनाने की तैयारी चल रही है।

2018 से लग्जरी घरों की मांग में अच्‍छी खासी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इस बढ़ोतरी का कारण कीमतों का स्थिर रहना बताया जा रहा है। संपत्ति सलाहकार फर्म एनारॉक की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक साल में डेढ़ से ढाई करोड़ रुपयों वाले लग्जरी फ्लैट्स का स्टॉक 12 फीसदी घटा है।

आपको बता दें कि नए और बड़े फ्लैट्स बनाने के बावजूद डीडीए हाउसिंग स्कीम को वैसा रेस्पॉन्स नहीं मिला, जैसी उम्मीद की जा रही थी। 18 हजार फ्लैट्स के लिए 40 हजार से अधिक आवेदन मिले। 60 से 70 पर्सेंट ऐप्लिकेशन वसंत कुंज के फ्लैट्स के लिए हैं। माना जा रहा है कि नरेला के काफी फ्लैट्स खाली ही रह सकते हैं।

'इस वर्ष की शुरुआत में कुछ झटके लगने के बाद एनबीएफसी का बिजनेस पटरी पर लौटता दिख रहा था और जैंडर, केकेआर और टाटा कैपिटल जैसे फंड्स ने चुनिंदा बिल्डर्स को कैपिटल देनी शुरू की थी। हालांकि, यह लेंडिंग कड़े क्रेडिट नॉर्म्स पर आधारित था और फोकस विशेष प्रॉजेक्ट के बजाय कंपनी की वित्तीय ताकत पर था।

पिछले पांच सालों में मुंबई, दिल्ली, लखनऊ, कानपुर और कोच्चि का औसत बेहतर रहा है। बता दें कि पिछले एक साल में सर्वाधिक 28.84 फीसदी वृद्धि कोच्चि में हुई है, जबकि कानपुर में भारी गिरावट आई है। समान अवधि में दिल्ली में 3.31 फीसदी की तेजी आई है।

दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले ज्यादातर लोग आसपास के इलाकों में ही घर खरीदना चाहते हैं। इनमें से 38% ऑफिस और स्कूल की निकटता को ध्यान में रखकर घर चाहते हैं, जबकि 62% लोग नजदीक के उपनगरीय इलाकों में निवेश करना चाहते हैं।

देशभर के डिफॉल्ट बिल्डर्स के खिलाफ रेरा जहां कई कदम उठा रहा है, ऐसे में संभवतः यह भारत का पहला प्रोजेक्ट है, जिसे डि-रजिस्टर कर दिया गया है। हालांकि, यूपी-रेरा के दावे की पुष्टि नहीं हो पाई है।