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कोरोना अब उतना घातक नही रह गया है। इटली के एक सायंटिस्ट ने दावा किया था कि ये ताजा म्यूटेशन के बाद हुआ है। अब कोरोना पहले जैसा खतरनाक नहीं रह गया है और इसकी मारक क्षमता में कमजोरी होती दिख रही है।

कोरोना से बचाव के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) के इस्तेमाल को लेकर किए गए रिसर्च में अच्छे नतीजे आए हैं।

कोरोनावायरस पर काबू पाने के प्रयास में दिन रात वैज्ञानिक वैक्सीन बनाने के लिए मेहनत कर रहे हैं। पूरी दुनिया इस महामारी की चपेट में है।

दुनिया कोरोनावायरस का इलाज ढूंढने की कोशिश कर रही है। कई वैज्ञानिक दिन रात वैक्सीन या एंटीबॉडीज की खोज में जुटे हुए हैं जो कोरोना से लड़ने में मदद करें।

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की एक प्रमुख महामारीविद् शी चंगली से साफ तौर पर कहा कि यह एक नये तरीके का वायरस है, और यह इस तरह से पैदा हुआ है।

एक नई रिसर्च के मुताबिक गंध को महसूस न कर पाना भी कोरोनावायरस के संक्रमण का एक लक्षण है लेकिन अमेरिकी वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे लक्षण वाले मरीजों में बीमारी गंभीर रूप नहीं लेगी।

चीनी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने कोरोना वायरस को खत्म करने में सक्षम एक ह्यूमन न्यूट्रोलाइजिंग एंटीबॉडी की खोज की है।

कोरोना पर रिसर्च कर रहे वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इस खतरनाक वायरस का मरीज 11 दिनों के बाद किसी दूसरे को संक्रमित नहीं कर सकता है।

वैक्सीन खोजने की कड़ी में थाईलैंड ने वैक्सीन को लेकर थोड़ी बहुत उम्मीद जगाई है। थाईलैंड अब वैक्सीन ट्रायल के अगले चरण में पहुंच गया है।

कोरोना वायरस से बीमार मरीजों को फायदा पहुंचाने वाली पहली और एकमात्र दवा से जुड़ा डेटा पहली बार प्रकाशित किया गया है।