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कई तरह की मशीनों पर काम किया जा रहा है जो कोरोना को शायद रोक सकें। मगर फिलहाल देश में ऐसी मशीन आ चुकी है जो कोविड-19 के वायरस को सरफेस और हवा में 99 प्रतिशत तक खत्म कर सकती है।

मास्क लगाते हैं तो 90 फीसदी तक ड्रॉप्लेट्स (छींक-खांसी की छोटी बूंदें) से होने वाला संक्रमण रोका जा सकता है। हाइजीन के इन दोनों जरूरी उपायों पर की गई रिसर्च में भी लगभग वही बातें निकल कर आई हैं जो हर देश के विशेषज्ञ और सरकारें कह रही हैं।

कोरोना जैसी महामारी में जहां अब तक कोई सटीक इलाज नहीं मिल पाया है ऐसे में भारत में आयुर्वेद का सहारा लिया जा रहा है। भारत की इस प्राचीन चिकित्सा पद्धिति के सहारे कोरोना का इलाज संभव हो सकता है।

कोविड-19 रिकवरी से जुड़ी रिपोर्ट के मुताबिक इलाज के बाद कोरोना से रिकवर होने वाले मरीजों की हफ्तों बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इनसे संक्रमण नहीं फैल सकता।

अंटार्कटिका पेनिनसुला के कुछ हिस्सों में सतह पर फैलने वाली शैवाल जिसे काई भी कहा जाता है उसके बढ़ने का अनुमान रिसर्चर्स ने लगाया है और यह सब दुनियाभर में बढ़ते तापमान के कारण है।

कुछ लोग जो कोरोनावायरस से ठीक भी हुए थे वो अब इलाज के बाद फिर से संक्रमित होने लगे हैं। ऐसे कई देश है जहां से इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं।

वर्तमान में 5 ऐसी दवाएं हैं, जिनका इस्तेमाल कोरोना के इलाज में किया जा रहा है और ये दवाएं मरीजों को ठीक भी कर रही हैं।

महामारी कोरोनावायरस वैसे तो हर उम्र के लोगों को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। लेकिन कुछ रिसर्च के मुताबिक इसका असर बुजुर्गों और कम उम्र के बच्चों पर सर्वाधिक घातक नजर आ रहा है।

बांग्लादेश के डॉक्टरों की एक टीम ने दावा किया है कि व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली दो दवाओं के मिश्रण पर उनके अनुसंधान के कोरोना वायरस के गंभीर लक्षण वाले रोगियों के उपचार में ‘‘आश्चर्यजनक परिणाम’’ सामने आए हैं।

कोरोना काल में अब तक मेरे पोस्टमॉर्टम हाउस में 36-37 संदिग्ध कोरोना संक्रमित शव पहुंचे हैं। इनमें पुरुष, महिलाएं, बच्चों सहित हर वर्ग और उम्र के कोरोना सस्पेक्टेड शामिल रहे हैं।