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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़कर आर्थिक क्षेत्र में काम करने वाले संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने स्वदेशी और स्वावलंबी भारत के समर्थन में इन दिनों डिजिटल हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। इस अभियान को स्वदेशी स्वावलंबन अभियान नाम दिया गया है।

भारत ने भी साफ कर दिया है कि अगर कूटनीतिक तौर पर कोई रास्ता नहीं निकलेगा तो चीन की हरकतों का जवाब दिया जाएगा। लेकिन भारत में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपने अंदाज में इस मुद्दे पर सियासत कर रहे हैं।

संघ के निर्देशों के मुताबिक इस अभियान में वही लोग जुड़ सकते है जिनकी उम्र 20 से 45 साल की हो। उन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, दमा आदि जैसी कोई बीमारी नहीं होनी चाहिए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने कहा कि वे आशा करते हैं कि वैश्विक महामारी कोरोनावायरस के खत्म होने के बाद इसकी उत्पत्ति को लेकर जांच की जाएगी।

महामारी काल में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 'वर्तमान परिदृश्य और हमारी' भूमिका विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि कोरोना से पूरी दुनिया जूझ रही है।

कोरोनावायरस की वजह से देश भर में लागू लॉकडाउन की वजह से लोगों को हो रही परेशानियों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कम करने में लगा है।

आरएसएस ने कहा कि इनके (जमात) कारण कोरोना ग्रस्त लोगों की संख्या बढ़ी है और यह बात सभी लोग मान रहे हैं। आरएसएस के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य ने कहा कि अगर उनका नेतृत्व समय पर कार्यक्रम निरस्त करता तो अच्छा रहता।

मोहन भागवत ने कहा, "पूर्व में दो-दो साल तक शाखाएं बंद रहीं। फिर भी संघ का काम चलता रहा। शासन-प्रशासन की नीति और सामूहिक अनुशासन का पालन समाज को करना है। सामूहिक अनुशासन का पालन संघ की शिक्षा रही है। इसके हम अभ्यस्थ हैं।"

भैया जी जोशी के मुताबिक अभी देशभर में कोरोना का प्रकोप है। प्रशासनिक अनुरोध के अनुसार अभी सभी को इसकी रोकथाम में लगना है, लिहाजा प्रतिनिधि सभा की बैठक फिलहाल रद्द की जाती है।

पिछले साल महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना वाले गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिला था, लेकिन इसके बावजूद भाजपा सरकार नहीं बना सकी थी।