shaheen bag

दिल्ली के शाहीनबाग में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन को बंद करवाने को लेकर दो गुट शनिवार देर रात आपस में भिड़ गए। दोनों पक्षों में करीब आधे घंटे तक मारपीट और गालीगलौज हुई। एक गुट चाहता था कि प्रधानमंत्री के द्वारा 'जनता कर्फ्यू' के ऐलान का समर्थन किया जाए, जबकि दूसरा गुट इस आह्वान का पालन करने को तैयार नही था।

शाहीनबाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ जारी प्रदर्शन से जुड़े एक प्रदर्शनकारी में कोरोनावायरस की पुष्टि हुई है। जहांगीरपुरी निवासी इस शख्स की बहन इसी महीने सऊदी अरब से आई है, जो संक्रमित पाई गई है।

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि पूरे देश में कोरोनावायरस फैल रहा है , इसलिए वो प्रदर्शन बंद कर दें। कम से कम जनता कर्फ्यू वाले दिन प्रदर्शन नहीं करें।

पिछले करीब तीन महीने से लगातार शाहीनबाग आ रहीं फौजिया ने कहा, प्रधानमंत्री एक दिन के जनता कर्फ्यू की बात कर रहे हैं, हम लोग तो यहां पिछले तीन महीने से सब कुछ छोड़ कर बैठे हैं।

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने वार्ताकार से कहा, जो हमारे ऊपर गलत टिप्पणियां हो रही हैं उस पर रोक लगनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हम भी चाहते हैं कि 9 नंबर रोड खुल जाए।

तीन दौर की वार्ता में कोई नतीजा निकल कर सामने नहीं आया है। तीन दिन की बातचीत बेनतीजा निकलने के बाद अब चौथे शनिवार को साधना रामचंद्रन अकेले ही शाहीन बाग पहुंच गईं और प्रदर्शनकारियों से बात की।

पिछले 67 दिनों से चल रहे इस धरने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि देश में प्रोटेस्ट का अधिकार सबको है लेकिन सड़क बंद करने का अधिकार किसी को नहीं है।

अदालत ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए सोमवार को वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े, साधना रामचंद्रन और पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह को वार्ताकार नियुक्त किया था।

शाहीनबाग में आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ समय से मतभेद देखने को मिल रहा है। पहले जहां प्रदर्शन खत्म करने और न करने को लेकर अलग-अलग गुटबाजी देखने को मिली थी, वहीं अब इस प्रदर्शन की अगुवाई को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है।

जामिया इलाके में गुरुवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में निकाले गए मार्च के दौरान एक नाबालिग ने गोली चला दी थी। इससे एक छात्र घायल हो गया था।