Shramik Special Train

राहुल के इस बयान पर अब केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने खुद मोर्चा संभाला लिया है। उन्होंने ट्विटर के जरिए राहुल पर पलटवार करते हुए करारा जवाब दिया है।

रेलवे बोर्ड, चेयरमैन, विनोद यादव ने 29 मई, तीन जून और नौ जून को लगातार तीन पत्र राज्यों को भेजा है , जिसमें कहा गया है कि राज्यों की मांग के अनुसार रेलवे 24 घंटों में श्रमिक स्पेशल ट्रेन उपलब्ध करा देगी।

ओडिशा के टिटलागढ़ रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार सुबह एक महिला यात्री ने श्रामिक स्पेशल ट्रेन में एक बच्चे को जन्म दिया।

सरकार के मुताबिक केंद्र की ओर से सभी राज्यों को लिखा गया है कि वे बतायें कि उन्हें अपने लोगों के लिए कितने ट्रेनों की जरूरत है? राज्य सरकारों की मांग के मुताबिक उन्हें 24 घंटे के भीतर ट्रेनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। केंद्र ने बताया कि सबसे अधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेन यूपी और बिहार गयी हैं।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा एक ट्वीट को लेकर विवादों में घिर गई है। दरअसल प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों को रेलवे द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने श्रमिक ट्रेनों में 80 लोगों की मृत्यु का भी दावा कर दिया। जिसके बाद उनके इस ट्वीट पर भारतीय रेलवे ने पलटवार करते हुए करारा जवाब दिया है।

भारतीय रेल ने साफ किया है कि कोई भी ट्रेन अपने मार्ग से नहीं भटकी है। रेलवे बोर्ड के चेयरमेन विनोद कुमार यादव ने इस बात का खंडन किया है कि ट्रेनों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में 9 दिनों तक समय लगा है।

श्रमिक स्पेशल ट्रेन के बारे में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विजय कुमार यादव ने शुक्रवार को कहा कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की मांग राज्‍यों की ओर से अब कम हो गई है।

पीयूष गोयल ने ट्वीट कर लिखा, 'मेरी सभी नागरिकों से अपील है कि गंभीर रोग से ग्रस्त, गर्भवती महिलाएं, व 65 से अधिक व 10 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में बहुत आवश्यक होने पर ही यात्रा करें।'

अन्य राज्यों से प्रवासी श्रमिकों का बिहार आने का सिलसिला जारी है। इस बीच श्रमिकों के परेशानियों से जूझने की खबर आती रहती हैं लेकिन गुरुवार को शेखपुरा से एक राहत वाली खबर आई जब श्रमिक एक्सप्रेस से यात्रा कर रही एक गर्भवती महिला ने बच्ची को जन्म दिया।

भारतीय रेल 27 मई तक 3543 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का परिचालन कर चुकी है। इस दौरान 26 दिनों में 48 लाख यात्रियों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाया जा चुका है।