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आजम के खिलाफ खिलाफ अब तक 84 मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें 30 मामले मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के लिए जमीन हड़पने के हैं। इन्हीं मामलों में उनका पक्ष जानने के लिए पुलिस ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की मगर आज़म ना मिले ना कोई जवाब दिया।

लोकसभा चुनाव के बाद अखिलेश यादव और शिवपाल यादव दोनों के सामने अपने-अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने की चुनौती है। यही वजह है कि दोनों के बीच जमी कड़वाहट की बर्फ पिघलनी शुरू हो गई है।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को आवंटित आलीशान बंगला और लोहिया ट्रस्ट कार्यालय का भवन खाली कराए जाने के बाद अब उनकी मंहगी एसयूवी मर्सिडीज कार भी वापस ली जाने वाली है।

राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा यह होने लगी है कि शिवपाल को कमजोर करके सपा अपना बेस वोट बचाने की कोशिश कर रही है। शिवपाल ने लोकसभा चुनाव के दौरान ही सपा छोड़ दी थी, लेकिन सपा ने उस समय उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म कराने को लेकर कोई पहल नहीं की थी।

समाजवादी पार्टी ने अब जिस तरह से शिवपाल सिंह यादव की विधानसभा सदस्यता खारिज करने के लिए याचिका लगाई है, उससे पता चलता है कि वर्ष 2016 से पार्टी में वर्चस्व के लिए शुरू हुई चाचा-भतीजे की लड़ाई थमने के दूर-दूर तक आसार नहीं हैं।

योगी सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े अभियान का असर राज्य की कमाई पर पड़ा है। राज्य की कमाई पिछले ढाई सालों में तेजी से बढ़ी है। आलम यह है पिछले एक साल के भीतर योगी सरकार ने अखिलेश यादव की पिछली सरकार को रेवेन्यू के मामले में बहुत पीछे छोड़ दिया है।

फैसल खान लाला आनंदीबेन पटेल को खत लिखकर कहा है कि, अखिलेश यादव 9 सितंबर को आजम खान के समर्थन में रामपुर में पहुंचकर दंगा कराना चाहते हैं।

जानकारी के मुताबिक उनके परिवार ने भी नियम कानूनों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। आजम खान की पत्नी तजीन फातिमा के खिलाफ डेरी अनियमितता के मामले में जांच शुरू कर दी गई है।

प्रशासन आजम के खिलाफ कोई भी नरम रुख रखने के मूड में नहीं है और अब आदेश जारी किया गया है कि, आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी से 17.5 एकड़ जमीन वापस ली जाएगी।

आजम खान कभी भी गिरफ्तार हो सकते हैं। रामपुर की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी है। वे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम की राह पर चल रहे हैं।