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धरती और सूरज के बीच 5 लैंग्रेंजियन प्वॉइंट हैं। इनमें से पहले प्वॉइंट पर आदित्य एल-1 यान को इसरो स्थापित करेगा। लैंग्रेंजियन प्वॉइंट वो जगह हैं, जहां धरती और सूरज के गुरुत्वाकर्षण बल मिलते हैं। इस तरह आदित्य एल-1 यान वहां एक जगह स्थिर रहेगा और सूरज का अध्ययन करता रहेगा।

चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर को इसरो के वैज्ञानिकों ने चांद की सतह पर 23 अगस्त की शाम 6 बजे सफलता से उतारा था। फिर विक्रम लैंडर से प्रज्ञान रोवर बाहर आया। प्रज्ञान रोवर चांद की सतह पर घूम-घूमकर अपने यंत्रों से तमाम प्रयोग और खोज करता रहा। प्रज्ञान रोवर 10 दिन में चांद की सतह पर 100 मीटर चला था।

Aditya L-1 Launch: प्रक्षेपण की तैयारियों के बारे में इसरो प्रमुख एस.सोमनाथ ने गुरुवार को चेन्नई में कहा, "रॉकेट और उपग्रह तैयार हैं। हमने प्रक्षेपण की तैयारियां पूरी कर ली हैं।"

गुरुवार के दिन से सूर्य, कर्क में प्रवेश कर चुके हैं। जैसे ही सूर्य का कर्क में गोचर हुआ, तभी से सम-सप्‍तम योग लग गया। इस योग के होने का अर्थ है कि सूर्य कर्क में और शनि मकर राशि में होंगे।