Taliban

तालिबान और अमेरिका एक टेबल पर आ चुके हैं और दोनों के बीच अफगानिस्तान में भविष्य को लेकर बातचीत अंतिम रूप ले रही है। लेकिन तालिबान का समर्थन करने वाला पाकिस्तान इसी संगठन के सामने अब बेबस है।

तालिबान के लोग सोशल डिस्टेंसिंग के लिए लोगों से मस्जिद आने के बजाए घरों पर ही नमाज पढ़ने को कह रहे हैं।

अमेरिका और तालिबान के बीच अफगानिस्तान में एक हफ्ते की जंगबंदी पर सहमति हो गई है। पाकिस्तानी मीडिया में अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन की तरफ से जारी एक बयान के हवाले से यह जानकारी दी गई है।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि हमला बल्ख जिले के दाव्लत अबद के खिली गुली इलाके में अफगान नेशनल आर्मी और राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय के संयुक्त सैन्य बेस पर किया गया।

अफगानिस्तान के सैन्य अड्डे के पास कार बम विस्फोट से दो नागरिकों की मौत हो गई, जबकि सेना के कुछ जवान सहित 70 से अधिक लोग घायल हो गए।

दोहा पहुंचने से पहले, खलीलजाद दो दिनों के लिए काबुल में थे, जिस दौरान उन्होंने अफगानिस्तान के शीर्ष सरकारी अधिकारियों और पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई सहित प्रमुख राजनेताओं के साथ बातचीत की।

सितंबर में दोनों पक्ष शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के बहुत करीब थे, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तालिबान द्वारा अमेरिकी सैनिकों को निशाना बना कर किए जा रहे लगातार हमलों की वजह से आखिरी पल में समझौता करने से मना कर दिया था।

भारतीय राजनयिक विदिशा मैत्रा ने बुधवार को कहा, "किसी भी समाधान की 'संवैधानिक वैधता' के साथ राजनीतिक स्वीकार्यता' होनी चाहिए और बिना शासित जगहों को आतंकवादियों और उनके समर्थकों के शोषण के लिए नहीं छोड़ना चाहिए।'

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अफगानिस्तान में 18 साल से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के प्रयास के तहत तालिबान के साथ चल रही वार्ता हमेशा के लिए खत्म हो गई है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने सोमवार को व्हाइट हाउस के रिपोर्टर्स को बताया, "जहां तक मेरा सवाल है, वह (वार्ता) हमेशा के लिए खत्म हो गई है।"

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका और तालिबान भविष्य में वार्ता बहाल कर सकते हैं। फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में पोम्पियो ने कहा कि गुरुवार को अफगानिस्तान में एक अमेरिकी सैनिक की मौत के बाद वार्ता फिलहाल खत्म कर दी गई है।