vaccine

विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो इस महामारी की रोकथाम के लिए फिलहाल दुनिया की 102 संस्थाएं वैक्सीन खोजने में जुटी हुई हैं।

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जहां दुनियाभर में मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) और इबोला की दवा रेमेडिसिविर की भारी मांग है।

अमेरिका के एरिजोना में वैज्ञानिकों ने कोरोना के SARS-CoV-2 वायरस में ऐसे अनूठे म्यूटेशन (बदलाव) और जेनेटिक पैटर्न का पता लगाया है जो 17 साल पहले सार्स वायरस के संक्रमण के समय देखा गया था।

मौजूदा समय में लगभग हर देश कोरोना के कहर का सामना कर रहा है। ऐसे में दुनियाभर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से यही उम्मीद की जा रही है कि वो जल्द से जल्द कोरोनावायरस की वैक्सीन तैयार करें।

अब तक अमेरिकी सरकार के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जनवरी 2021 तक कोविड-19 वैक्सीन उपलब्ध होनी की बात कही है। ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है देश के पास जल्द ही वैक्सीन होगी।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कोविड-19 वैक्सीन को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने से पहले कई चरणों को पूरा करना होगा।

दुनिया भर की तमाम बड़ी फार्मा कंपनियां वैश्विक महामारी कोरोनावायरस का इलाज ढूंढने की कोशिश में लगी हुई हैं। इसके लिए बड़े-बड़े वैज्ञानिक लैबोरेट्री के अंदर दिन-रात वैक्सीन बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

दुनिया भर में खतरनाक रूप लेते जा रहे कोरोना वायरस का तोड़ मिल गया है। इजरायल ने इस क्षेत्र में बाजी मार ली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन नोवल कोरोना वायरस को पहले ही महामारी घोषित कर चुका है।