World Health Organization (WHO)

ट्रंप ने चिट्ठी में आगे लिखा है कि अमेरिका विश्व स्वास्थ्य संगठन में अपनी मेंबरशिप पर भी दोबारा विचार कर सकता है। गौरतलब है कि अमेरिका की ओर से लगातार इस बात का आरोप लगाया गया है कि डब्ल्यूएचओ ने कोरोनावायरस के मामले में घोर लापरवाही बरती है और पूरी तरह से चीन का पक्ष लिया है, इसी वजह से दुनिया को भुगतना पड़ रहा है।

डेविड नाबरो ने कहा, 'मुझे लगता है कि हमें अगले दो साल तक इस वायरस के साथ ही रहने की आदत डाल लेनी चाहिए। दुनियाभर में मौजूद 7.8 बिलियन लोगों को भी इसके बारे में सोचना होगा और समय के हिसाब से अपने आपको भी बदलना होगा।'

डब्ल्यूएचओ ने आगे चेताते हुए कहा, "बीसीजी वैक्सीन बच्चों में ट्यूबरक्लोसिस के गंभीर परिणामों को रोकने में मददगार होती है लेकिन स्थानीय आपूर्ति होने पर इससे बीमारी बढ़ने और ट्यूबरक्लोसिस के चलते मौत के मामलों में वृद्धि देखने को मिल सकती है।"

संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस ने कहा कि मौजूदा स्वास्थ्य संकट के खत्म होने पर इस बात का अध्ययन करने के लिए समय होगा कि इस तरह की बीमारी कैसे उभरी और इतनी तेजी से कैसे फैल गई। साथ ही इसमें शामिल सभी पक्षों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जा सकेगा।

केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि कोविड-19 से निपटने के लिए देश की प्रतिक्रिया काफी सक्रिय रही है। वायरस के प्रकोप से पार पाने के लिए देश के प्रयासों की सराहना करते हुए सरकार ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने से पहले ही भारत ने अपनी सीमाओं पर एक व्यापक प्रतिक्रिया प्रणाली को अपना लिया था।

देश में कोरोनावायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत में कोरोनावायरस संक्रमण के मामलों की संख्या शनिवार को 300 के करीब पहुंच गई है। कोरोना की तमाम चिंताओं के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना पर मोदी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की एक बार फिर तारीफ की है। 

वक्तव्य के अनुसार चीन और अन्य देशों के अनुभव ने यह साबित कर दिया है कि कुछ सार्वभौमिक रूप से लागू उपायों से वायरस के प्रसार को धीमा किया जा सकता है जिससे महामारी का प्रभाव कम हो सकता है।