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शुक्रवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि उनकी टीम कोरोना वायरस की उत्पति के बारे में पता लगाने के लिए चीन रवाना हो गई है।

पिछले कुछ दिनों से चीन लगातार पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद पैदा कर रहा है। चीन ने वही रूस के साथ किया है। रूस के शहर पर चीन ने अपना दावा ठोका है।

भारत के मित्र देशों में एक रूस की तरफ चीन का झुकाव भी इन दिनों कुछ ज्यादा ही बढ़ा है। लेकिन आज भारत और रूस के बीच जिस सौदे को मंजूरी मिली है उसके बाद से ड्रैगन की परेशानी और बढ़नेवाली है।

इस एप को 2015 में ज्वाइन करते वक्त पीएम नरेंद्र मोदी ने उम्मीद जाहिर की थी कि दोनों देशों के बीच संबंध और सौहार्द्रपूर्ण होंगे।

जब भी भारत और चीन के बीच संघर्ष देखने को मिलता है कांग्रेस पार्टी चीन की भाषा बोलने लग जाती है। चाहे मामला डोकलाम का हो या फिर हाल ही में घटित हुई गलवान घाटी की घटना का।

हांगकांग में जिस तरह से चीन का विरोध जारी है उसके बीच अब चीन के अधिकार वाले तिब्बत ने भी उसके खिलाफ सर उठाना शुरू कर दिया है। ऐसे में चीन के लिए दोहरी मुश्किल खड़ी हो गई है।

जहां भारत के सैनिकों के पराक्रम को पूरी दुनिया सलाम कर रहा है वहीं चीन की इस धोखेबाजी के लिए हर मंच से उसकी फजीहत हो रही है।

देश में कोरोना काफी तेजी से फैल रहा है। इस घातक महामारी से अब तक 7 हजार से ज्यादा लोगों कि जान जा चुकी है। वहीं चीन को इस खतरनाक वायरस के लिए दुनिया के अधिकांश देश जिम्मेदार मानते हैं। इसी के चलते बिहार के पश्चिचम चंपारण जिले के बेतिया नगर में चीन के राष्ट्रपति शी जीन पिंग और विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर समेत कई अज्ञात लोगों पर बेतिया CJM कोर्ट में केस दायर किया गया है।

सेना ने प्रधानमंत्री और उनके कैबिनेट सहयोगियों को गलवन घाटी में पेट्रोलिंग पॉइंट 14 के पास एलएसी पर चीनी सेना की गतिविधियों और अन्य बिंदुओं पर जानकारी दी थी।

चीन ने रविवार को खुद को निर्दोष बताया और कहा कि विषाणु संक्रमण का पहला मामला वुहान में 27 दिसंबर को सामने आया था, जबकि विषाणुजनित निमोनिया और मानव से मानव में संक्रमण फैलने के बारे में 19 जनवरी को पता चला जिसके बाद इस पर अंकुश लगाने के लिए इसने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी।