वो सट्टा बाज़ार, जो तय करता है कहां किसको मिलेगा सिंहासन ?… राजस्थान में किसका होगा राजतिलक, देखिए आंकड़े

नई दिल्ली। राजधानी जयपुर के पश्चिम में मौजूद फलौदी चुनावी सट्टे की वजह से भी सुर्ख़ियों में रहता है। इस वक़्त सट्टे की वजह से यहां के बाज़ार में ख़ूब गहमागहमी रहती है। यहां के सट्टा बाज़ार की बात करें, तो शुरुआती दौर में ये कांग्रेस की बढ़त बता रहा था। मगर जानकार कहते हैं कि उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब नए सिरे से मुनादी की जाएगी।क़स्बे के मुख्य बाज़ार में बने चौक में सुबह 11 बजे से लोग जमा होने शुरू होते हैं और देर रात तक मजमा लगा रहता है। ये मजमा ऐसा दृश्य प्रस्तुत करता है मानो चुनावी विश्लेषकों का कोई हुजूम समीक्षा कर रहा हो। सट्टा ग़ैर-क़ानूनी है, लेकिन सामाजिक तौर पर इसे ग़लत नहीं माना जाता। इसलिए सब कुछ ज़ुबानी और एक दूसरे के भरोसे पर चलता है. इस क़स्बे की आबादी कोई पचास हज़ार है।

राजस्थान में फलौदी का सट्टा बाजार काफी मशहूर है। जोधपुर का एक छोटा सा कस्बा है फलौदी। यहां के लोग सट्टे की लत के इतने आदी हैं कि सट्टा किसी भी चीज पर लगा सकते हैं, चाहे अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव हो या निकाय चुनाव। विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक पर सट्टा लगता है। यहां तक कि लोग सांड़ की लड़ाई से लेकर बारिश आने तक पर सट्टा लगाते नजर आते हैं। क़स्बे में सट्टे के कारोबार के एक जानकार ने बताया कि कुल 20-22 लोग सट्टे के कारोबारी हैं जो सट्टे का आयोजन करते हैं। इसके बाद कुछ सट्टा लगाने वाले होते हैं। वो बताते हैं कि इस सट्टे के कारोबार में दलाल, लगाइवाल (सट्टा लगाने वाला) और खाइवाल (सट्टे पर पैसे लगाने वाला) तीन कड़ियां होती हैं।

फलौदी में सट्टे के जानकार कहते हैं कि सट्टा बाज़ार का चुनावी आकलन क़रीब-क़रीब सही साबित होता है। इसके लिए सट्टेबाज़ अख़बारों और टीवी चैनल की ख़बरों पर नज़र रखते हैं. इसके साथ वो अलग-अलग इलाक़ों में फ़ोन कर लोगों की नब्ज़ टटोलते हैं और राजनीतिक दलों के आंतरिक समीकरणों को देखकर आकलन करते हैं।फलौदी के एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि सट्टा यहां ऐसा चस्का है कि कुछ और नहीं तो चप्पल उछाल कर भी सट्टा लग जायेगा कि चपल उल्टी गिरेगी या सीधे मुंह।

बताया जाता है कि कभी फलौदी का नाम फलवृद्धिका था। क़स्बे में मौजूद क़िला इसके प्रभावी अतीत की गाथा बयान करता है। इसी क़िले में वीरानी ओढ़े बैठे एक महल के बारे में स्थानीय लोग कहते है कि कभी मुग़ल बादशाह हुमायूं ने संकट के समय इसमें पनाह ली थी।

राहुल गांधी की सलाह पर पायलट ने पार्टी में युवाओं पर ज्यादा से ज्यादा दांव खेलने का जोखिम उठाया है। उनके पांच उम्मीदवारों में से एक 40 वर्ष से कम उम्र का है। पार्टी ने रालोद, एनसीपी और राजद के साथ एक छोटा गठबंधन कर सहयोगियों के लिए पांच सीटें छोड़ी हैं। कांग्रेस ने 15 मुस्लिम उम्मीदवार भी उतारे हैं। भाजपा के एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार के रूप में वरिष्ठ मंत्री यूनुस खान एक पूर्व मुस्लिम रियासत टोंक में पायलट को चुनौती देने उतरे हैं। मुस्लिम वोटों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस को अपने राजपूत उम्मीदवारों की संख्या कम करनी पड़ी है। भाजपा ने जहां 27 राजपूतों को टिकट दिया है तो कांग्रेस ने 13 राजपूत प्रत्याशी उतारे हैं।इससे कांग्रेस के लिए राजपूतों का एकतरफा वोट प्राप्त करना मुश्किल हो जाएगा भाजपा के लिए राजपूत समाज से आने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रचार में उतरने से कांग्रेस के लिए चुनौतियां और बढ़ गई हैं।

इन आंकड़ों से भी आप समझ सकते हैं कि भाजपा से ज्यादा परेशानियां राजस्थान में कांग्रेस के लिए बढ़ रही हैं।

हालांकि ये भी सच है कि पीएम मोदी अपने भाषणों से वोटरों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। और 2014 के बाद से ही लगातार ये देखा जा रहा है। जिस तरह पीएम मोदी ने राजस्थान में चुनाव के आखिरी दिन सर्जिकल स्ट्राइक और पाक का मुद्दा उठाकर कांग्रेस को घेरा है। उसने हवा का रुख बदलकर रख दिया है।

चुनावी पंडितों का मानना है कि इससे काफी हद तक बीजेपी को सफलता मिल सकती है। चूंकि पीएम मोदी अपने भाषणों के जरिए 7-10% वोट खींचने की क्षमता रखते हैं। ऐसा कई मौकों पर देखा गया है।

पाकिस्तानियों हिंदुओं का मुद्दा

पाकिस्तान से सटे इस राज्य में सबसे ज्यादा पाक हिंदू रहते हैं। करीब ऐसे सात हज़ार लोग हैं जो भारत की नागरिकता चाहते हैं। इससे पहले भारत-पाकिस्तान जंग के दौरान भी बड़ी तादाद में हिन्दू अल्पसंख्यक पनाह की गुहार करते हुए सरहद पार करके इस तरफ़ चले आए थे। बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में नागरिकता का वादा किया है।

इस तरह मरुस्थली भू भाग के ज़िलों में इनकी अच्छी उपस्थिति है। इन पाकिस्तानी हिन्दुओं का बसेरा राजस्थान के जोधपुर में है, जहां वे मुश्किल हालात में जीवन बसर कर रहे हैं। बीजेपी लगातार पाकिस्तान और हिंदुओं का मुद्दा उठाती है, जिसका फायदा भी इस चुनाव में देखने को मिल सकती है।

 

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