केजरीवाल ने कुमार विश्वास को थमा दिया झुनझुना!

Avatar Written by: May 3, 2017 3:32 pm

अंतत: अरविंद केजरीवाल ने कुमार विश्वास को मनाकर आम आदमी पार्टी में होने जा रही बड़ी टूट को टाल ही दिया। आप विधायक अमानतुल्लाह खान पर गुस्से से लाल कुमार विश्वास भी बिना कुछ ज्यादा लिए मान गए। कहां उन्हें आप का राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। बताया जा रहा था कि तकरीबन 37 विधायक केजरीवाल पर दबाव बना रहे थे कि कुमार को आप का संयोजक बना दिया जाए।

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वहीं कुमार विश्वास अमनातुल्लाह को हटाए जाने से कम पर मानने को तैयार नहीं थे। लेकिन कुमार को केजरीवाल ने दिया क्या। उन्हें राजस्थान में पार्टी का प्रभार सौंप दिया गया। कुमार के लिए यह कोई उपलब्धि नहीं है बल्कि उन्हें झुनझुना पकड़ाने जैसा है।

वहीं अमनातुल्लाह खान को पार्टी से सिर्फ निलंबित कर दिया गया है। कुमार विश्वास इसी से ही संतोष जाहिर कर रहे हैं। कहां कुमार कह रहे थे कि अगर अमानतुल्लाह खान ने आपत्तिजनक बयान केजरीवाल या मनीष सिसोदिया के खिलाफ दिया होता तो उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया होता।

यानी कुमार की मांग खान को पार्टी से बाहर कराने की ही थी। लेकिन उन्हें तो सिर्फ आप की प्राथमिक सदस्यता से सस्पेंड ही किया गया है। साथ ही एक जांच समिति बनाकर उनके बयानों की जांच कराने की औपचारिकता करने का फैसला किया गया है। यानी जांच समिति से क्लीन चिट मिलते ही दो चार माह बाद अमानतुल्लाह खान फिर से वापस पार्टी की सदस्यता में लौटेंगे।

…तो यह है केजरीवाल की लीपापोती!

कुमार विश्वास के आप पर अविश्वास को लेकर जो एपिसोड चल रहा था उस पर लीपापोती का परदा केजरीवाल ने डाल दिया है। अब सवाल यह उठता है कि कुमार विश्वास को इस बात का पता चला कि अमानतुल्लाह के पीछे कौन था जिसका जिक्र वह प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कर रहे थे। कुमार कह रहे थे कि अमानतुल्लाह तो सिर्फ मुखौटा हैं इसके पीछे से बोल कोई और रहा है। कौन है यह और।

kumar vishwasक्या इस पर विश्वास को संतोषजनक जवाब मिल गया है। क्या ऐसा कहकर वह कहीं न कहीं अरविंद केजरीवाल या उनके इर्दगिर्द रहने वाले कथित चापलूस गैंग के सदस्यों में से किसी पर कटाक्ष नहीं कर रहे थे। अगर ऐसा था तो फिर विश्वास अब मौन क्योें हो गए। क्या राजस्थान का प्रभारी पद हासिल करने से विश्वास खुश हो गए हैं।

क्या अमानतुल्लाह के निलंबित भर कर दिए जाने से कुमार संतुष्ट हो गए हैं। लगता तो यही है कि कुमार विश्वास भी आम आदमी पार्टी से नाता तोड़ने की अपरोक्ष धमकी देकर एक तरह की दबाव की सियासत कर रहे थे। कुमार कहते नहीं थक रहे थे कि आप भी कांग्रेस की तरह हो गई है। तो अब आप में कांग्रेस के ही तर्ज पर लिए गए फैसले से वह खुश हो गए हैं कि उन्होंने केजरीवाल से समझौता कर लिया।

किसी सदस्य को लीपापोती के मकसद से सस्पेंड कर देना और उसके आचरण के लिए जांच की समिति बना देना तो कांग्रेस में स्थापित प्रक्रिया है। ठीक वही आप में भी हो रहा है। तो अब विश्वास को इस कांग्रेसी संस्कृति से नाराजगी नहीं है।

…तो ऐसे फंस गए विश्वास!

सवाल तो इतने हैं कि कुमार विश्वास को इस पर सफाई देनी चाहिए। लेकिन शायद अब कुमार को मीडिया की जरूरत फिलहाल नहीं है। तभी तो आप की राजनैतिक मामलों की समिति की बैठक में जाते वक्त मीडिया से बचते हुए कुमार निकल गए थे।

Arvind-Kejriwal-with-party-leaders-Kumar-Vishwas-and-Ashutoshजी हां वही विश्वास जो दो रोज पहले हर न्यूज चैलन पर जा-जाकर साक्षात्कार दे रहे थे और आप में मौजूदा हालात पर बरस रहे थे। छह हार के बाद आप में जो हो रहा है वह नहीं होना चाहिए। क्या आश्वासन मिला विश्वास को इस पर। अभी आप वालंटियर्स को इसका जवाब तो चाहिए ही होगा। अगले साल राजस्थान में चुनाव हैं और आप उसमें कूदने जा रही है।

विश्वास को केजरीवाल ने जिम्मेवारी दी है तो उनकी पंजाब को लेकर शिकायत के मद्देनजर ही दी होगी। पंजाब चुनाव अभियान में तवज्जो नहीं मिलने की वजह से विश्वास काफी नाराज बताए जा रहे थे। दिल्ली नगर निगम चुनावों में तवज्जो नहीं मिलने से विश्वास खफा बताए जा रहे थे।

यही वजह है कि वह बार-बार आप को मिली आधा दर्जन शिकस्तों का जिक्र करते थे। अब राजस्थान में मिली जिम्मेवारी को विश्वास को निभाने की चुनौती होगी। केजरीवाल ने एक तरह से उन्हें ऐसी जिम्मेवारी दे दी है जहां वह चुनावी तौर पर कुछ कर दिखाने के इम्तिहान में उतरने जा रहे होंगे। आप इस भाजपा शासित सूबे में कितना दमखम से उतर पाती है इसको लेकर विश्वास को कसौटी पर जांचने से केजरीवाल कतई नहीं चूकेंगे।