बदलेगा इतिहास, साल में दूसरी बार आज लाल किले से तिरंगा फहराएंगे पीएम मोदी

Written by: October 21, 2018 8:37 am

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज लालकिले से तिरंगा फहराएंगे। हालांकि अभीतक सिर्फ 15 अगस्त को ही भारत के प्रधानमंत्री लालकिले से तिरंगा फहराते आएं हैं, चूंकि ये संविधान सम्मत रहा है। पर अब पीएम मोदी एक तरह से नया इतिहास भी रच रहे हैं, जिसके जरिए महापुरुषों को नए सिरे से सम्मान देने की तैयारी है।इसी को लेकर पीएम मोदी ने अपने फेसबुक वॉल पर एक वीडियो संदेश जारी कर बताया है कि वह इस बार 21 अक्टूबर को लाल किले के प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे। वीडियो में पीएम मोदी ने बताया कि सुभाष चंद्र बोस ने देश की आजादी के लिए आजाद हिंद फौज की स्थापना की थी। उस वक्त आजाद हिंद फौज ने भारत की आजादी का ऐलान करते हुए 21 अक्टूबर को ही स्वतंत्रता दिवस मनाया था।

पीएम ने बताई 21 अक्टूबर की खासियत

21 अक्टूबर को मैं लाल किले से तिरंगा फहराऊंगा… जानिए क्यों!

21 अक्टूबर को मैं लाल किले से तिरंगा फहराऊंगा… जानिए क्यों!

Posted by Narendra Modi on 2018 m. spalio 17 d., trečiadienis

21 अक्टूबर 2018 को इस ऐतिहासिक घटना के 75 साल पूरे हो रहे हैं, इसी उपलक्ष्य में पीएम नरेंद्र मोदी ने इस दिन लाल किले के प्राचीर से झंडा फहराने का फैसला लिया है। पीएम मोदी ने वीडियो संदेश में कहा है, ‘अगर कोई समाज अपने इतिहास से कट जाता है, तो उसका कटी हुई पतंग की तरह गिरना तय होता है। हम सभी का सम्मान करते हैं, जिसने इस देश की सेवा की हो, वह चाहे किसी भी दल का हो, हम उसका सम्मान करते हैं।

पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘हमारी सरकार ने बाबा साहेब आंबेडकर से जुड़े हुए पंचतीर्थ के लिए भी काम किया है, ऐसा इसलिए क्योंकि पांच महत्वपूर्ण स्थल बाबा साहेब के जीवन से जुड़ी अलग-अलग समय को प्रस्तुत करता है। 1857 से शुरू हुई आजादी लड़ाई में हमारे आदिवासी भाइयों ने बहुत बड़ा योगदान दिया। भगवान बिरसा मुंडा को कौन जानता था, उन्हें भुला दिया गया था, हमने फैसला लिया है कि देश के जिन हिस्सों में ऐसे आदिवासी समाज के लोगों से जुड़े किस्से हैं, वहां म्यूजियम बनाए जाएंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ’21 अक्टूबर को लाल किले के प्राचीर से होने वाले झंडा रोहन कार्यक्रम में शामिल होने का मुझे सौभाग्य मिलेगा. अब आप पूछेंगे कि आप 21 अक्टूबर को झंडा रोहन क्यों, मैं आपको बताता हूं कि 21 अक्टूबर को सुभाष चंद्र बोस के बनाए आजाद हिंद फौज की 75वीं वर्षगांठ पूरे हो रहे हैं.’ उन्होंने कहा है कि उनके इस कदम का कुछ दल विरोध करेंगे, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वह देश के लिए बलिदान देने वाले लोगों का सम्मान नहीं करेंगे।