गेस्‍ट हाउस कांड: जिसका जिक्र खुद मायावती ने किया, BJP नेता ने बचाई थी जान

Written by Newsroom Staff January 12, 2019 3:23 pm

नई दिल्ली। 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन ने औपचारिक ऐलान कर दिया है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और बीएसपी सुप्रीमो मायावती के साथ ज्वॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक बार फिर मायावती ने गेस्‍ट हाउस कांड का जिक्र किया। आखिर क्‍या था गेस्‍ट हाउस कांड, जिसके बारे में मायावती ने प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान जिक्र किया, जानिए आज हम आपको बताते हैं।बता दें कि 2 जून 1995 को मायावती, विधायकों के साथ लखनऊ के मीराबाई गेस्ट हाउस के कमरा नंबर 1 में थीं। अचानक समाजवादी पार्टी समर्थक गेस्ट हाउस में घुस आए। समर्थकों ने मायावती से अभद्रता की, अपशब्द कहे। खुद को बचाने के लिए मायावती कमरे में बंद हो गईं। ये भी बता दें कि बाबरी विध्वंस के बाद 1993 यूपी में गठबंधन की राजनीति की नई पटकथा लिखी गई।मुलायम सिंह यादव और बसपा अध्यक्ष कांशीराम ने बीजेपी को रोकने के लिए गठबंधन किया था और जनता ने बहुमत दे दिया। मुलायम सिंह के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनीस लेकिन दो साल बाद ही 2 जून 1995 को एक रैली में मायावती ने सपा से गठबंधन वापसी की घोषणा कर दी, अचानक से हुए इस समर्थन वापसी की घोषणा से मुलायम सरकार अल्पमत में आ गई।

उसके बाद राज्य सरकार के गेस्ट हाउस में सपा कार्यकर्ताओं के उन्मादी भीड़ ने जो किया वह किसी कलंक से कम नहीं था। मायावती के जीवन पर आधारित किताब ‘बहनजी’ के मुताबिक भीड़ एक दलित महिला नेता पर अभद्र टिप्‍पणी कर रही थी, भीड़ उनके साथ मारपीट करने वाली थी लेकिन उन्‍होंने अपने आपको एक कमरे में बंद कर लिया था।

मायावती की जान उस वक्त के फर्रुखाबाद जिले के भाजपा नेता ब्रह्मदत्त दि्ृवेदी ने बचाई थी, जिनकी बाद में गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। सपा नेता विजय सिंह पर हत्या का आरोप लगा। विजय सिंह को 2003 में हाईकोर्ट से जमानत मिली थी, लेकिन 26 अप्रैल 2017 को हाई कोर्ट ने सीबीआई कोर्ट की सजा बरकरार रखते हुए विजय सिंह को जेल भेज दिया।

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