क्या रत्नों का प्रभाव (असर) होता हैं?

आम तौर पर जो नगीने अंगूठी और लॉकेट में ज्योतिषीय सलाह के अनुसार पहने जाते हैं ,उसे रत्न कहते हैं । इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि नगीने का नीचे का हिस्सा शरीर से स्पर्श करता रहता है । ये नगीने कई रंगों के होते हैं ।वास्तव में ये रत्न नौ ग्रहों के किरणों के संवाहक होते हैं और किसी खास ग्रह की किरण को अवशोषित करते हैं। रत्नों को धारण करने के पीछे मात्र उनकी चमक प्रमुख कारण नहीं है बल्कि अपने लक्ष्य के अनुसार उनका लाभ प्राप्त करना अत्यंत महत्वपूर्ण है और यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि ये रत्न जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करते किस प्रकार हैं।

हम अपने आस-पास व्यक्तियों को भिन्न-भिन्न रत्न पहने हुए देखते हैं। ये रत्न वास्तव में कार्य कैसे करते हैं और हमारी जन्मकुंडली में बैठे ग्रहों पर क्या प्रभाव डालते हैं और किस व्यक्ति को कौन से विशेष रत्न धारण करने चाहिये, ये सब बातें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

रत्नों का प्रभाव-

रत्नों में एक प्रकार की दिव्य शक्ति होती है। वास्तव में रत्नों का जो हम पर प्रभाव पड़ता है वह ग्रहों के रंग व उनके प्रकाश की किरणों के कंपन के द्वारा पड़ता है। हमारे प्राचीन ऋषियों ने अपने प्रयोगों, अनुभव व दिव्यदृष्टि से ग्रहों के रंग को जान लिया था और उसी के अनुरूप उन्होंने ग्रहों के रत्न निर्धारित किए।

ज्योतिर्विद पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार जब हम कोई रत्न धारण करते हैं तो वह रत्न अपने ग्रह द्वारा प्रस्फुटित प्रकाश किरणों को आकर्षित करके हमारे शरीर तक पहुंचा देता है और अनावश्यक व हानिकारक किरणों के कंपन को अपने भीतर सोख लेता है। अत: रत्न ग्रह के द्वारा ब्रह्मांड में फैली उसकी विशेष किरणों की ऊर्जा को मनुष्य को प्राप्त कराने में एक विशेष फिल्टर का कार्य करते हैं।

जितने भी रत्न या उपरत्न है वे सब किसी न किसी प्रकार के पत्थर है। चाहे वे पारदर्शी हो, या अपारदर्शी, सघन घनत्व के हो या विरल घनत्व के, रंगीन हो या सादेङ्घ। और ये जितने भी पत्थर है वे सब किसी न किसी रासायनिक पदार्थों के किसी आनुपातिक संयोग से बने हैं। विविध भारतीय एवं विदेशी तथा हिन्दू एवं गैर हिन्दू धर्म ग्रंथों में इनका वर्णन मिलता है। आधुनिक विज्ञान ने अभी तक मात्र शुद्ध एवं एकल 128 तत्वों को पहचानने में सफलता प्राप्त की है। जिसका वर्णन मेंडलीफ की आधुनिक आवर्त सारणी में किया गया है। किन्तु ये एकल तत्व है अर्थात् इनमें किसी दूसरे तत्व या पदार्थ का मिश्रण नहीं प्राप्त होता है। किन्तु एक बात अवश्य है कि इनमें कुछ एक को समस्थानिक के नाम से जाना जाता है।

वैज्ञानिक भी मानते हैं कि हमारे शरीर के चारों ओर एक आभामण्डल होता है, जिसे वे अवफअ कहते हैं। ये आभामण्डल सभी जीवित वस्तुओं के आसपास मौजूद होता है। मनुष्य शरीर में इसका आकार लगभग 2 फीट की दूरी तक रहता है।यह आभामण्डल अपने सम्पर्क में आने वाले सभी लोगों को प्रभावित करता है। हर व्यक्ति का आभामण्डल कुछ लोगों को सकारात्मक और कुछ लोगों को नकारात्मक प्रभाव होता है, जो कि परस्पर एकदूसरे की प्रकृति पर निर्भर होता है। विभिन्न मशीनें इस आभामण्डल को अलग अलग रंगों के रूप में दिखाती हैं।

वैज्ञानिकों ने रंगों का विश्लेषण करके पाया कि हर रंग का अपना विशिष्ट कंपन या स्पंदन होता है। यह स्पन्दन हमारे शरीर के आभामण्डल, हमारी भावनाओं, विचारों, कार्यकलाप के तरीके, किसी भी घटना पर हमारी प्रतिक्रिया, हमारी अभिव्यक्तियों आदि को सम्पूर्ण रूप से प्रभावित करते है। वैज्ञानिकों के अनुसार हर रत्न में अलग क्रियात्मक स्पन्दन होता है। इस स्पन्दन के कारण ही रत्न अपना विशिष्ट प्रभाव मानव शरीर पर छोड़ते हैं। प्राचीन संहिता ग्रंथों में जो उल्लेख मिलता है, उसमें एकल तत्व मात्र 108 ही बताए गए हैं। इनसे बनने वाले यौगिकों एवं पदार्थों की संख्या 39000 से भी ऊपर बताई गई हैं। इनमें कुछ एक आज तक या तो चिह्नित नहीं हो पाए है, या फिर अनुपलब्ध हैं। इनका विवरण, रत्नाकर प्रकाश, तत्वमेरू, रत्न वलय, रत्नगर्भा वसुंधरा, रत्नोदधि आदि उदित एवं अनुदित ग्रंथों में दिया गया है।

 

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि आपका शरीर बहुत अधिक सेंसेटिव है। यह यादों का बहुत बड़ा संग्रह है। अगर आपने इम्यूनोलॉजी/ immunology को study किया है या नहीं भी किया तब भी आप यह साधारण सी बात जानते होंगे कि हमारे शरीर विभिन्न प्रकार के cells जो हमें इम्यूनिटी/immunity प्रोवाइड/provide करते हैं उनमें कुछ मेमोरी / memory cells भी होते हैं। मतलब यह कि अगर आप किसी बीमारी से इस समय ग्रस्त हुए और ठीक हो गए और आने वाले कई वर्षों में आपको यह स्वास्थ्य संबंधी परेशानी दोबारा नहीं हुई लेकिन यह memory cells तब भी आपके शरीर में बने रहें गए ताकि भविष्य में कभी आप अगर इस बीमारी से फिर से ग्रसित हुए तो यह एकदम अपना काम कर पाए। इसके अलावा किसी एक हल्का सा स्पर्श, आपके द्वारा किया गया भोजन, आपका सबकॉन्शियस माइंड इन सब चीजों को याद रखता है।

 

अपने Human Psychology का वह तथ्य तो जानते ही होंगे जिसमें यह कहा जाता है कि जब आपको कोई व्यक्ति घूर रहा होता है तब आपको अचानक से यह इनट्यूशन कैसे आती है कि आपको ऊपर देखना चाहिए कुछ अटपटा सा लग रहा है। आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि आप जब ध्यान नहीं भी दे रहे होते हैं तब भी आपकी ज्ञान इंद्रियां चीज़ों को रजिस्टर कर रही होती है। इसके अलावा हम अन्य ग्रहों की बात ना करते हुए यहां पर सिर्फ सूर्य और चंद्रमा की बात करना चाहेंगे। जिनका प्रभाव अपने शरीर पर देखा ही होगा। जब इनके प्रभाव से सागर में इतनी उथल-पुथल हो सकती है तो आप समझ ही सकते हैं कि आपके शरीर में 70% वॉटर है।

इन सब उदाहरणों के माध्यम से हम सिर्फ आपको यह बताना चाहते हैं कि आपका शरीर इतना अधिक सजग है। आपके आसपास के वातावरण और गतिविधियों के लिए। तो आप इससे क्या समझते हैं?? कि आपके द्वारा धारण किया गई (कॉन्शसनेस mind) कोई वस्तु या आपके शरीर के साथ स्पर्श में लाएगी गई कोई अन्य चीज़ आपके शरीर पर कोई प्रभाव नहीं दिखाएगी??

 

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