बोहरा मुस्लिम क्यों हैं पीएम मोदी के करीब, जानें इनका इतिहास

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज इंदौर में दाऊदी बोहरा समुदाय के एक कार्यक्रम में शामिल हुए। तो इसी के साथ पीएम ने एक और रिकॉर्ड बना दिया, क्योंकि देश में पहली बार कोई पीएम उनके धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुआ। आज आपको बताते हैं कौन है ये दाऊदी बोहरा समुदाय? जो खुद को बाकी मुस्लिमों से अलग समझता है। चूंकि लोग ज्यादातर मुस्लिमों को शिया सुन्नी तक ही जानते हैं, लेकिन इस्लाम में 72 फिरके हैं जो अपने तरीके से इस्लाम में विश्वास रखते हैं।

Mufaddal Saifuddin

इन्हीं में से एक है दाऊदी बोहरा समुदाय। बोहरा मुस्लिम, शिया और सुन्नी दोनों में होते हैं। सुन्नी बोहरा हनफी इस्लामिक कानून को मानते हैं। वहीं दाऊदी बोहरा मान्यताओं में शियाओं के करीब होते हैं। बोहरा समुदाय की भारत में लाखों की आबादी है। बता दें कि दुनियाभर में दाऊदी बोहरा समुदाय की पहचान काफी समृद्ध, संभ्रांत और पढ़ा-लिखे समुदाय के तौर पर होती है। बोहरा समुदाय के ज्यादातर लोग व्यापारी हैं।

Maulana saifuddin and Narendra Modi

दाऊदी बोहरा समुदाय के लोग सूरत, अहमदाबाद, जामनगर, राजकोट, दाहोद, मुंबई, पुणे, नागपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा उज्जैन, इन्दौर, शाजापुर, कोलकाता के अलावा चैन्नई में रहते हैं। तो वहीं पाकिस्तान के सिंध प्रांत के अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, दुबई, ईराक, यमन और सऊदी अरब में भी उनकी अच्छी तादाद है। कारोबारी बोहरा समुदाय पीएम मोदी को अपना समर्थन देता रहा है। मोदी ने गुजरात में व्यापारियों की सुविधा के हिसाब से नीतियां बनाईं जो बोहरा समुदाय के उनके साथ आने की बड़ी वजह बनीं।

Daudi bohra

1588 में दाऊद बिन कुतब शाह और सुलेमान के अनुयायियों के बीच विभाजन हो गया। सुलेमानियों के प्रमुख यमन में रहते हैं, जबकि सबसे अधिक संख्या में होने के कारण दाऊदी बोहराओं का मुख्यालय मुंबई में है। भारत में बोहरों की आबादी 20 लाख से ज्यादा बताई जाती है। इनमें 15 लाख दाऊदी बोहरा हैं। बोहरा लोग सूफियों और मजारों पर खास विश्वास रखते हैं। सुन्नी बोहरा हनफ़ी इस्लामिक कानून को मानते हैं, जबकि दाऊदी बोहरा समुदाय इस्माइली शिया समुदाय का उप-समुदाय है।

Narendra Modi Mosque Indore

दाऊदी बोहरा इमामों को मानते हैं। उनके 21वें और अंतिम इमाम तैयब अबुल कासिम थे जिसके बाद 1132 से आध्यात्मिक गुरुओं की परंपरा शुरू हो गई जो दाई-अल- मुतलक कहलाते हैं. 52वें दाई-अल-मुतलक डॉ. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन थे। उनके निधन के बाद जनवरी 2014 से बेटे सैयदना डॉ. मुफद्दल सैफुद्दीन ने उनके उत्तराधिकारी के तौर पर 53वें दाई-अल-मुतलक के रूप में जिम्मेदारी संभाली है।

PM Narendra Modi In Indore

बोहरा समुदाय के पुरुष-महिलाएं बाकी मुसलमानों से खुद को अलग मानते हैं। बोहरा समुदाय की महिलाएं काले रंग के बुर्के की जगह अक्सर गुलाबी रंग के बुर्के में दिखती हैं, इन्हें लाल, हरे या नीले रंग के बुर्के भी पहने हुए देखा जा सकता है। इतिहासकारों और समाजशास्त्रियों का कहना है कि दाऊदी बोहरा महिलाओं का पारंपरिक परिधान रिदा है जो इन्हें देश के बाकी मुस्लिमों से अलग दिखाता है।

Narendra Modi Mosque Indore

समाजशास्त्रियों का कहना है कि बोहरा समुदाय के लोगों में गैर-मुस्लिमों या हिंदुओं के सामने यह छवि बनाने की कोशिश रहती है कि वे बाकी मुस्लिमों से अलग हैं और इसलिए उन्हें निशाना ना बनाया जाए। इस समुदाय के लोग जमीन पर बैठकर एक बड़ी सी थाल में एक साथ खाते हैं। बिना पूछे कोई नया शख्स उनकी थाली में उनके साथ खा सकता है।Narendra Modi Mosque Indore

बोहरा समुदाय में कड़े नियम बनाए गए हैं कि उनके निजी और धार्मिक दुनिया में किसी बाहरी का प्रवेश ना हो सके। इसके लिए जिसके पास बोहरा समुदाय का आईडी कार्ड नहीं है, उन्हें उनकी मस्जिदों में प्रवेश की अनुमति नहीं है।

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