ट्रंप के व्यापार युद्ध पर जी-20 में मोदी, शी जिनपिंग व पुतिन करेंगे चर्चा

राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 28-29 जून को ओसाका में शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जाने से पहले चीन के सहायक विदेश मंत्री झांग जुन ने सोमवार को कहा कि जिनपिंग, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक से इतर मुलाकात करेंगे।

Written by: June 24, 2019 7:31 pm

बीजिंग। चीन, भारत व रूस के नेता इस हफ्ते के अंत में जापान में होने वाले जी 20 शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात करेंगे और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘संरक्षणवादी’ व्यापार नीति व ‘डराने-धमकाने की कार्यप्रणाली’ से मुकाबला करने के लिए तरीकों पर चर्चा करेंगे।


राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 28-29 जून को ओसाका में शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जाने से पहले चीन के सहायक विदेश मंत्री झांग जुन ने सोमवार को कहा कि जिनपिंग, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक से इतर मुलाकात करेंगे।

झांग ने कहा कि त्रिपक्षीय बैठक का खास महत्व है और इस बार इसका सकारात्मक नतीजा आएगा। ऐसी ही त्रिपक्षीय बैठक बीते साल ब्यूनस आयर्स में जी20 शिखर सम्मेलन में भी हुई थी। झांग ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “ओसाका शिखर सम्मेलन के दौरान चीन, रूस और भारत के नेताओं की त्रिपक्षीय बैठक होगी। चीन, भारत, रूस त्रिपक्षीय बैठक ने विकास की गति को बनाए रखा है।”

उन्होंने कहा, “मौजूदा परिस्थितियों में यह तीनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है कि प्रमुख वैश्विक मुद्दों के समन्वय को मजबूत करें, संयुक्त रूप से बहुपक्षवाद को बनाए रखें और वैश्विक शांति में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मामलों व बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ाएं व संरक्षणवाद का विरोध करें।”

उन्होंने कहा, “चीन बहुपक्षीयता को मजबूती से बनाए रखने के लिए दूसरों के साथ काम करेगा।” हालांकि, ट्रंप व शी की बहुप्रतीक्षित मुलाकात व्यापार युद्ध को समाप्त करने के लिए शिखर सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण होगी। लेकिन शी की मोदी व पुतिन के साथ त्रिपक्षीय बैठक भी ध्यान आकर्षित करेगी। मोदी चीन के राष्ट्रपति शी व रूस के राष्ट्रपति पुतिन से अलग-अलग भी मुलाकात करेंगे।

चीन के लिए नुकसानदायक व्यापार युद्ध छेड़ने के बाद ट्रंप ने भारत का रुख किया। इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने भारतीय सामानों के लिए तरजीही व्यापार को खत्म कर दिया। इस तरजीही व्यापार के जरिए कई भारतीय सामानों को बिना शुल्क के प्रवेश दिया जाता था। भारत ने भी इसका जवाब अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ लगाकर दिया है।