ब्रिटेन में कोरोना संक्रमितों पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की टेस्टिंग शुरू करने की अनुमति मिली

पूर्व में ब्रिटेन में बड़े स्तर पर परीक्षण में पाया गया कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन कोविड-19 से मरीजों की मौत को रोकने में कारगर नहीं साबित हुई। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी ब्रिटेन और दूसरी जगहों के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर दवा पर अपने परीक्षण को स्थगित कर दिया था।

Written by: July 1, 2020 3:54 pm

नई दिल्ली। मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, जिसे भारत द्वारा अन्य देशों में निर्यात किया गया है, उस दवा के ब्रिटेन में ट्रायल करने की मंजूरी मिल गई है। हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का कोविड-19 के लिए ब्रिटेन की चिकित्सा नियामक एजेंसी ने परीक्षण बहाल करने की अनुमति दे दी है। इस परीक्षण में यह देखा जाएगा कि यह दवा लेने पर स्वास्थ्यकर्मियों का कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव होता है या नहीं।

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गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस दवा के फायदे गिना चुके हैं। दवा और स्वास्थ्य देखभाल उत्पाद नियामक एजेंसी ने पिछले महीने प्रतिष्ठित पत्रिका ‘लांसेट’ में एक शोध के छपने के बाद इस दवा के परीक्षण पर रोक लगा दी थी।शोध में यह कहा गया था कि दवा के इस्तेमाल से मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। पता चला कि इस शोध के लिए जिन आंकड़ों का इस्तेमाल हुआ वो सही नहीं थे।

Donald Trump

पूर्व में ब्रिटेन में बड़े स्तर पर परीक्षण में पाया गया कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन कोविड-19 से मरीजों की मौत को रोकने में कारगर नहीं साबित हुई। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी ब्रिटेन और दूसरी जगहों के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर दवा पर अपने परीक्षण को स्थगित कर दिया था। लेकिन, डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि एहतियाती तौर पर पहले ही हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा दी जाए तो संक्रमण से बचाव होगा या नहीं इसका पता अभी नहीं लग पाया है। नियामक एजेंसी ने मंगलवार को कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों में दवा के इस्तेमाल पर मौजूदा परीक्षण को जारी रखने की उसने अनुमति दे दी है।