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Ajab-Gazab News: अजब-गजब होता था मुगल शासकों के दिवाली मनाने का तरीका, जानिए कौन-सा बादशाह कैसे मनाता था दीपोत्सव? 

नई दिल्ली। सनातन धर्म में हर्षोल्लास से मनाया जाने वाला मुख्य त्योहार दीपावली इसी हफ्ते पड़ रहा है। देशभर में ये त्योहार अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। कहीं दिये जलाकर तो कहीं लकड़ियां जलाकर इस त्योहार का जश्न मनाया जाता है। बनारस में इसे ‘देव दीपावली’ के नाम से मनाया जाता है। इस त्योहार को हिन्दू धर्म के लोग सदियों से मनाते आ रहे हैं। इसकी पुष्टि इस बात से हो जाती है कि दिवाली का उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है। इसके अलावा, 7वीं सदी में राजा हर्षवर्धन के नाटकों और 10वीं शताब्दी में राजशेखर के ‘काव्यमीमांसा’ में भी दीपोत्सव का उल्लेख मिलता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि केवल हिंदू ही नहीं, अन्य धर्म के लोग भी इस त्योहार को पूरे धूमधाम से मनाते रहे हैं। इतना ही नहीं, इतिहासकारों की मानें, तो आज जिस धूमधाम के साथ दिवाली का उत्सव पूरा देश मनाता है उसकी शुरुआत मुगल काल में हुई थी और उस दौरान के कई शासकों ने अलग-अलग तरीके से दीपावली का उत्सव मनाया, कैसे? आइए जानते हैं…

मोहम्मद बिन तुगलक

14वीं सदी में मुगल शासक मोहम्मद बिन तुगलक अपने अंतरमहल में दीवाली का जश्न मानता था। साथ ही बड़े स्तर के भोज का आयोजन भी करता था। हालांकि, आतिशबाजी का जिक्र उसके शासनकाल में कहीं नहीं मिला है।

अकबर

16वीं सदी में भारत पर मुगल बादशाह अकबर का शासन था। दिवाली पर वो अपने दरबार की भव्य सजावट करवाया करता था। इसके अलावा, इस दिन उसके द्वारा फारसी भाषा में कराए गए रामायण का पाठ किया जाता था। साथ ही अकबर श्रीराम की अयोध्या वापसी के नाट्य मंचन का आयोजन भी करवाता था। इतना ही नहीं, अकबर अपने मित्र राजाओं के यहां दीवाली पर मिठाइयां और भेंट भी भिजवाता था। अकबर के शासन काल में हल्की-फुल्की आतिशबाजी का जिक्र मिलता है। इसके अलावा, शांडिल्य (झूमर) और फानूस की रोशनी से महल जगमगाता रहता था।

शाहजहां

मुगल बादशाह शाहजहां का शासन 17वीं शताब्दी में था। शाहजहां दिवाली के अवसर पर 56 राज्यों से अलग-अलग किस्म की मिठाईयां मंगाकर 56 प्रकार के थालों में सजवाता था। साथ ही युद्ध में शहीद हुए वीरों की याद में सूरजक्रांत नाम के एक पत्थर पर सूर्य किरण लगाकर उसे पुन: रोशन किया जाता था, जो पूरे साल जलता था। इसके अलावा, 40 मन तेल डालकर 40 फिट का दिया भी जलाया जाता था। शाहजहां के शासनकाल में भव्य रुप से आतिशबाजी होती थी, जिसमें महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था की जाती थी और आम जनता के देखने के लिए भी खास व्यवस्था की जाती थी। इस त्योहार को पूरे हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया जाता था। दिवाली पर होने वाला भोज भी सात्विक होता था।

मोहम्मद शाह

मुगल शासक मोहम्मद शाह अपने शासन के दौरान यानी 1719 से 1748 तक दिवाली का जश्न काफी धूम-धाम से मनाता था। संगीत और साहित्य में गहरी रूचि रखने वाला ये शासक ‘रंगीला’ के नाम से मशहूर था। दिवाली के मौके पर वो अपनी तस्वीर बनवाता था। उसके शासनकाल में लाल किले की भव्य तरीके से सजावट की जाती थी और तरह-तरह के पकवान बनवाकर आम जनता में बंटवाता था।

बहादुर शाह जफर

भारत का अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह जफर लाल किले में दीवाली की थीम पर आधारित नाटकों का आयोजन करवाता था। इसे आम जनता के देखने के लिए खास व्यवस्था की जाती थी।

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