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West Bengal : मालदा में NCPCR के अध्यक्ष और बाल अधिकार संरक्षण आयोग सदस्यों के बीच हुई बहस, जानिए क्या थी वजह

कोलकाता। हाल ही में एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो की मालदा में एक बलात्कार पीड़िता के घर जाने पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्यों के साथ कहासुनी हो गई। प्रियांक कानूनगो ने आरोप लगाते हुए कहा राज्य आयोग के अध्यक्ष हमें परिसर में प्रवेश नहीं करने दे रहे हैं। मैंने रिक्वेस्ट की कि हमें अपना काम करने दीजिए। मामला 10 दिन पुराना है, हम यहां इसलिए आए क्योंकि आयोग कुछ नहीं कर रहा था। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, ‘हम जांच करना चाहते हैं कि क्या घटना की जांच के दौरान सभी नियमों का पालन किया गया और क्या स्कूल ने सभी सुरक्षा उपायों का पालन किया। मुझे लगता है कि इसके लिए वरिष्ठ अधिकारी जिम्मेदार हैं। बच्चे की मां ने मामला दर्ज कराया था। पुलिस सतर्क होती तो बच्चे को बचाया जा सकता था

इससे पहले प्रियांक कानूनगो ने कहा कि कोलकाता के तिलजला इलाके में एक नाबालिग लड़की के घर जाने के दौरान पुलिस अधिकारियों ने उनसे मारपीट की। हालांकि कानूनगो के आरोप को खारिज कर दिया और कहा कि अधिकारियों ने उनके साथ सहयोग किया था, और एनसीपीसीआर प्रमुख ने उनके साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया गया।

गौरतलब है कि यह पूरा मामला तूल तब पकड़ा जब आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने ट्वीट किया उन्होंने ट्वीट में लिखा, ‘पश्चिम बंगाल के तिलजिला थाने में बंगाल पुलिस के अधिकारी बिस्वाक मुखर्जी ने मेरे साथ मारपीट की। पुलिसकर्मी एनसीपीसीआर की जांच कार्यवाही की चोरी छिपे रिकॉर्डिंग कर रहे थे। विरोध करने पर मेरे साथ मारपीट की गई है। पुलिसकर्मी गुपचुप तरीके से हमारी जांच की कार्यवाही रिकॉर्ड कर रहे थे। उन्होंने इसका विरोध करने पर मुझे पीटा।’ ट्वीट में कानूनगो ने एक वीडियो भी पोस्ट किया है, इस वीडियो में पुलिस उनके साथ मारपीट करती देखी जा सकती है।

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