कानपुर। बीते दिनों म्यांमार में 7.7 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया। इससे बैंकॉक तक हिल गया। म्यांमार में भूकंप से 2000 से ज्यादा लोगों की जान गई है। अब आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर जावेद मलिक ने चेतावनी दी है कि भारत में भी बड़ा भूकंप आ सकता है। न्यूज चैनल आजतक की खबर के मुताबिक आईआईटी कानपुर में अर्थ साइंसेज विभाग के प्रोफेर जावेद मलिक ने कहा है कि भारत के सिलीगुड़ी में धरती की सतह के नीचे गंगा-बंगाल फॉल्ट यानी बड़ी दरार है। आईआईटी के प्रोफेसर जावेद मलिक के मुताबिक गंगा-बंगाल फॉल्ट के बीच में कई और भी फॉल्ट हैं। उनका कहना है कि एक फॉल्ट के सक्रिय होने से दूसरा फॉल्ट भी हरकत कर सकता है।
प्रोफेसर जावेद मलिक के मुताबिक एक सागाइंग फॉल्ट है और ये जमीन के ऊपर दिखता है। सागाइंग फॉल्ट म्यांमार के अराकान से अंडमान द्वीप और इंडोनेशिया के सुमात्रा तक एक जोन का हिस्सा है। आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर के मुताबिक अब तक के शोध से पता चला है कि सागाइंग फॉल्ट में हर 150-200 साल में बड़ा भूकंप आता है। प्रोफेसर जावेद मलिक का कहना है कि हिमालय के नीचे भी कई सक्रिय फॉल्ट हैं। उनका कहना है कि हमें सिर्फ टेक्टोनिक प्लेट के आसपास भूकंपों को नहीं देखना चाहिए और बड़ा भूकंप आने का इंतजार नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि इस बारे में और शोध करना चाहिए। साथ ही बड़े भूकंप के असर को कम करने की दिशा में भी काम करना चाहिए।
प्रोफेसर जावेद मलिक ने न्यूज चैनल को बताया कि गंगा-बंगाल फॉल्ट और सागाइंग फॉल्ट के अलावा भारत में डावकी, कोपली और डिब्रूचौतांग फॉल्ट भी है। ये फॉल्ट गंगा-बंगाल फॉल्ट और सागाइंग फॉल्ट के बीच में पड़ता है। इस तरह देखें, तो देश के पूर्वोत्तर के अलावा हिमालय से लगे राज्यों में भूकंप आने की सबसे ज्यादा आशंका है। ये सभी जगह भूकंप संबंधी जोन-5 में आते हैं। जोन-5 वो जगह होती है, जहां विनाशकारी भूकंप होने का खतरा रहता है। देश की राजधानी दिल्ली भी भूकंप के लिहाज से बहुत संवेदनशील है। ये जोन-4 में आता है। यानी दिल्ली में 6 की तीव्रता का भूकंप आ सकता है। प्रोफेसर जावेद मलिक के मुताबिक गंगा-बंगाल फॉल्ट से लेकर सागाइंग फॉल्ट तक धरती के भीतर बहुत दबाव है। प्रोफेसर मलिक के मुताबिक जिन भूकंप का केंद्र धरती की सतह से 5 से 20 किलोमीटर भीतर होता है, वे ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।