नई दिल्ली। मोदी सरकार वक्फ संशोधन बिल लेकर आई है। इस बिल को 8 अगस्त 2024 को लोकसभा में पेश किया गया था। इसके बाद इसे विस्तृत चर्चा के लिए जेपीसी को भेजा गया था। जेपीसी में वक्फ संशोधन बिल पर 108 घंटे चर्चा हुई थी और 284 हितधारकों से भी सुझाव लिए गए थे। वक्फ संशोधन बिल पर जेपीसी में चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने 572 संशोधन सुझाए थे। इनमें से 44 संशोधन को छांटा गया और फिर चर्चा के बाद 14 को ही वक्फ संशोधन बिल में शामिल करने का जेपीसी ने सुझाव दिया। विपक्ष ने जो संशोधन सुझाए थे, जेपीसी में चर्चा के बाद बहुमत के आधार पर उनको नकार दिया गया था। जानिए वक्फ संशोधन बिल में क्या अहम प्रावधान किए गए हैं।
जेपीसी ने वक्फ संशोधन बिल में बदलाव के जो सुझाव दिए, उसके मुताबिक हर कोई अपनी संपत्ति वक्फ नहीं कर सकेगा। इसके लिए 5 साल तक इस्लाम को मानने की बात कही गई है। जेपीसी की अनुशंसा के मुताबिक वक्फ बोर्डों में 2 गैर मुस्लिम और 2 महिला सदस्य भी होंगे। केंद्रीय वक्फ परिषद में केंद्र सरकार का मंत्री, 3 सांसद, 2 पूर्व जज, राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त 4 लोग रखे जाएंगे। ये सभी गैर मुस्लिम होंगे। वक्फ ट्रिब्यूनलों का प्रमुख जिला जज स्तर का होगा। वक्फ ट्रिब्यूनलों में संयुक्त सचिव स्तर का सरकारी अफसर भी होगा। वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसलों को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी। पहले वक्फ संपत्तियों के लिए सर्वेयर होता था। अब सर्वेयर की जगह डीएम या उससे बड़ा अधिकारी होगा। जो राजस्व रिकॉर्ड देखेगा और बताएगा कि वक्फ की गई संपत्ति संबंधित व्यक्ति की है या नहीं। साथ ही विवादित जमीन के बारे में भी डीएम या उससे बड़े अधिकारी तय करेंगे।
2 अप्रैल 2025 से पहले वक्फ की गई संपत्तियां जस की तस रहेंगी। जिन वक्फ संपत्तियों पर विवाद है, उनका निपटारा होने के बाद ही वक्फ बोर्ड उनको लेगा। सरकारी संपत्ति पर अगर वक्फ बोर्ड ने दावा किया है, तो उसे मान्य नहीं किया जाएगा। वहीं, हर वक्फ संपत्ति के बारे में केंद्रीय डेटाबेस में जानकारी देना जरूरी होगा। इसके लिए 6 महीने का वक्त तय किया गया है। अगर केंद्रीय डेटाबेस में वक्फ संपत्ति की जानकारी नहीं दी जाती, तो विवाद होने पर कोर्ट जाने का हक नहीं रहने वाला। वक्फ न्यायाधिकरण कुछ मामलों में वक्त संपत्ति की जानकारी देने के लिए वक्त बढ़ा सकता है।