दमोह। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने दमोह के मिशन अस्पताल पर बड़ा आरोप लगाया है। प्रियंक कानूनगो ने एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि दमोह के इस अस्पताल में नकली डॉक्टर ने दिल की बीमारी के इलाज के लिए ऑपरेशन किए। जिससे 7 मरीजों की मौत हुई है। मानवाधिकार आयोग के सदस्य ने आगे लिखा है कि दमोह के संबंधित अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना का लाभ भी दिया जाता है। उनका आरोप है कि दमोह के मिशन अस्पताल में सरकारी धनराशि का दुरुपयोग भी किया गया। प्रियंक कानूनगो ने कहा है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम दमोह जाकर मिशनरी अस्पताल के बारे में जांच करेगी।
दमोह मध्यप्रदेश 📌
मिशनरी के अस्पताल में नक़ली डॉक्टर द्वारा ह्रदय रोग के उपचार के नाम पर रोगियों के ऑपरेशन किए जाने के दौरान 7 लोगों की अकाल मृत्यु का मामला प्रकाश में आया है।
शिकायत के अनुसार उक्त मिशनरी अस्पताल प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना से आच्छादित है इसलिए सरकारी राशि का… pic.twitter.com/Fo8eJmghGp— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (@KanoongoPriyank) April 4, 2025
दमोह के मिशन अस्पताल में कथित तौर पर नकली डॉक्टर के हाथ सर्जरी से 7 मरीजों की मौत का मामला फरवरी का बताया जा रहा है। अखबार की खबर के मुताबिक नरेंद्र यादव नाम के शख्स ने अपना नाम एनकेम जॉन बताया और दमोह के मिशन अस्पताल में काम करता रहा। बाल कल्याण समिति नाम की संस्था के अध्यक्ष दीपक तिवारी ने मानवाधिकार आयोग में इसकी शिकायत की। उनका ये भी कहना है कि इस मामले की जांच में ढिलाई बरती जा रही है। अब प्रियंक कानूनगो के आरोप के बाद मामला गर्माने के आसार हैं।
आरोप ये लग रहा है कि नरेंद्र यादव नाम के शख्स ने खुद को लंदन का डॉक्टर बताया। अब सवाल ये खड़ा होता है कि अगर प्रियंक कानूनगो का आरोप सही है, तो मिशन अस्पताल चलाने वालों ने कथित डॉक्टर की डिग्री और पहले जहां भी काम किया उसकी जांच क्या नहीं की थी? इस मामले में दमोह के संबंधित अस्पताल की प्रबंधक पुष्पा खरे का कहना है कि ये सही नहीं है और गलत आंकड़े दिए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इस बारे में बाकी जानकारी बाद में दी जाएगी। डीएम सुधीर कोचर के हवाले से मध्य प्रदेश की मीडिया ने बताया है कि अभी मामले की जांच चल रही है। वहीं, सीएमएचओ का कहना है कि अभी मामले पर गोपनीयता बरतने के लिए कहा गया है। इसलिए कुछ कह नहीं सकते।