News Room Post

Pariksha Pe Charcha: सपने देखना अच्छी बात है लेकिन सपनों के लिए सोते रहना ये तो सही नहीं : पीएम मोदी

Suhan Sehgal pm modi

नई दिल्ली। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर छात्रों से वर्चुअल तरीके से परीक्षा पर चर्चा की। इस दौरान कई छात्रों ने पीएम मोदी से अपने सवाल किए। जिसका पीएम मोदी ने बेहतर करीके से जवाब दिए। बता दें कि इस चर्चा के दौरान पीएम मोदी छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद किया। कोरोना के खौफ के बीच बोर्ड की परीक्षा देने वाले छात्रों से पीएम मोदी बात करके उनके सवालों के जवाब दिए। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि, “एक बात मैं देशवासियों, अभिभावकों, अध्यापकों को बताना चाहता हूं कि ये परीक्षा पर चर्चा है लेकिन सिर्फ परीक्षा की ही चर्चा नहीं है। बहुत कुछ बातें हो सकती हैं, एक नए आत्मविश्वास पैदा करना है।”

इस चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि, “ये ‘परीक्षा पे चर्चा’ है, लेकिन सिर्फ़ परीक्षा की ही चर्चा नहीं है! बहुत कुछ बातें हो सकती हैं, एक नए आत्मविश्वास पैदा करना है। जैसे अपने घर में बैठ कर बाते करते हैं, अपनों के बीच बात करते हैं, दोस्तों के साथ बात करते हैं, आइए हम भी ऐसे ही बाते करेंगे।”

परीक्षा पे चर्चा अपडेट-

आपका मन अशांत रहेगाा, चिंता में रहेगा, तो इस बात की संभावना बहुत ज्यादा होगी कि जैसे ही आप Question Paper देखेंगे, कुछ देर के लिए सबकुछ भूल जाएंगे। इसका सबसे अच्छा उपाय यही है कि आपको अपनी सारी टेंशन परीक्षा हॉल के बाहर छोड़कर जाना चाहिए।

Involve, internalize, associate और visualize. Memory को sharp करने के लिए इस formula पर आप चल सकते हैं।

वो बातें जिनसे आप पूरी तरह से जुड़ गए हैं, मग्न हो गए हैं, वो बातें जो आपका हिस्सा बन गई हैं, आपके विचार प्रवाह का हिस्सा बन गई हैं। उन्हें आप कभी भूलते नहीं हैं।

सपनों में खोए रहना अच्छा लगता है। सपने देखना अच्छी बात है, लेकिन सपने को लेकर के बैठे रहना और सपनों के लिए सोते रहना ये तो सही नहीं है। सपनों से आगे बढ़कर, अपने सपनों को पाने का संकल्प ये बहुत महत्वपूर्ण है।

आवश्यक है कि दसवीं क्लास में, बारवीं क्लास में भी आप अपने आसपास के जीवन को Observe करना सीखिए। आपके आसपास इतने सारे प्रोफेशन हैं, Nature of jobs हैं।

प्रचार माध्यमों से हजार दो हजार लोग हमारे सामने आते हैं, दुनिया इतनी छोटी नहीं है। इतनी बड़ी विश्व व्यवस्था, इतना लंबा मानव इतिहास, इतनी तेजी से हो रहे परिवर्तन, बहुत सारे अवसर लेकर आते हैं।

करियर के चुनाव में एक पक्ष ये भी है कि बहुत से लोग जीवन में आसान रूट की तलाश में रहते हैं। बहुत जल्द वाह-वाही मिल जाए, आर्थिक रूप से बड़ा स्टेट्स बन जाए। ये इच्छा ही जीवन में कभी-कभी अंधकार का शुरुआत करने का कारण बन जाती है।

किसी को भी motivate करने का पहला पार्ट है- Training. Proper training एक बार बच्चे का मन train हो जाएगा तब उसके बाद motivation का समय शुरू होगा।

बच्चों के पीछे इसलिए भागना पड़ता है क्योंकि उनकी रफ्तार हमसे ज्यादा है। बच्चों को बताने, सिखाने, संस्कार देने की जिम्मेदारी परिवार की ही है, लेकिन कई बार बड़े होने के साथ हमें भी मूल्यांकन करना चाहिए।

हमने जो अपना भाव-विश्व बनाया है, वो जब व्यवहार की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है तब बच्चों के मन में अंतरद्वंद शुरु हो जाता है।

बच्चे बड़े स्मार्ट होते हैं। जो आप कहेंगे, उसे वो करेंगे या नहीं करेंगे, यह कहना मुश्किल है, लेकिन इस बात की पूरी संभावना होती है कि जो आप कर रहे हैं, वो उसे बहुत बारीक़ी से देखता है और दोहराने के लिए लालायित हो जाता है।

खाली समय में हमें अपनी Curiosity, जिज्ञासा बढ़ाने की और ऐसी कौन सी चीजें हम कर सकते हैं जो शायद बहुत productive हो जाएगी।

अपने Thoughts को, emotions को, express का एक creative तरीका दीजिए। Knowledge का दायरा कई बार वहीं तक सीमित होता है, जो आपको उपलब्ध है, जो आपके आसपास है।

जब आप खाली समय earn करते हैं तो आपको उसकी सबसे ज्यादा value पता चलती है। इसलिए आपकी लाइफ ऐसी होनी चाहिए कि जब आप खाली समय earn करें तो वो आपको असीम आनंद दे।

यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि खाली समय में किन चीजों से बचना चाहिए, नहीं तो वो ही चीज सारा समय खा जाएंगी। अंत में रिफ्रेश-रिलेक्स होने के बजाए आप तंग हो जाएंगे। थकान महसूस करने लगेंगे।

जो लोग जीवन में बहुत सफल हैं, वो हर विषय में पारंगत नहीं होते। लेकिन किसी एक विषय पर, किसी एक सब्जेक्ट पर उनकी पकड़ जबरदस्त होती है।

आपको भले कुछ विषय मुश्किल लगते हों, ये आपके जीवन में कोई कमी नहीं है। आप बस ये बात ध्यान रखिए कि मुश्किल लगने वाले विषयों की पढ़ाई से दूर मत भागिए।

जब मैं मुख्यमंत्री था, उसके बाद मैं प्रधानमंत्री बना तो मुझे भी बहुत कुछ पढ़ना पढ़ता है। बहुत कुछ सीखना पड़ता है। चीजों को समझना पड़ता है। तो मैं क्या करता था कि जो मुश्किल बातें होती हैं, मैं सुबह जो शुरु करता हूं तो कठिन चीजों से शुरु करना पसंद करता हूं।

पढ़ाई के लिए आपके पास दो घंटे हैं तो हर विषय को समान भाव से पढ़िए। पढ़ाई की बात है तो कठिन चीज को पहले लीजिए, आपका माइंड फ्रेश है तो कठिन चीज को पहले लेने का प्रयास कीजिए। कठिन को हल कर लेंगे तो सरल तो और भी आसान हो जाएगा।

परीक्षा जीवन को गढ़ने का एक अवसर है, उसे उसी रूप में लेना चाहिए। हमें अपने आप को कसौटी पर कसने के मौके खोजते ही रहना चाहिए, ताकि हम और अच्छा कर सकें। हमें भागना नहीं चाहिए।

समस्या तब होती है जब हम एग्जाम को ही जैसे जीवन के सपनों का अंत मान लेते हैं, जीवन-मरण का प्रश्न बना देते हैं। एग्जाम जीवन को गड़ने का एक अवसर है, एक मौका है उसे उसी रूप में लेना चाहिए।

समस्या तब होती है जब हम एग्जाम को ही जैसे जीवन के सपनों का अंत मान लेते हैं, जीवन-मरण का प्रश्न बना देते हैं। एग्जाम जीवन को गड़ने का एक अवसर है, एक मौका है उसे उसी रूप में लेना चाहिए।

हमारे यहां एग्जाम के लिए एक शब्द है- कसौटी। मतलब खुद को कसना है, ऐसा नहीं है कि एग्जाम आखिरी मौका है। बल्कि एग्जाम तो एक प्रकार से एक लंबी जिंदगी जीने के लिए अपने आप को कसने का उत्तम अवसर है।

पहले मां-बाप बच्चों के साथ कई विषयों पर जुड़े रहते थे और सहज भी रहते थे। आजकल मां-बाप करियर, पढ़ाई सैलेबस तक बच्चों के साथ इंवॉल्व रहते हैं। अगर मां-बाप ज्यादा इंवॉल्व रहते हैं, तो बच्चों की रुचि, प्रकृति, प्रवृत्ति को समझते हैं और बच्चों की कमियों को भरते हैं।

ये परीक्षा पर चर्चा का पहला वर्चुअल एडिशन है। हम पिछले एक साल से कोरोना के बीच जी रहे हैं और उसके कारण हर किसी को नया इनोवेशन करना पड़ रहा है। मुझे भी आप लोगों से मिलने का मोह इस बार छोड़ एक नए फॉर्मेट में आपके बीच आना पड़ रहा है।

Exit mobile version