प्रयागराज। अवैध धर्मांतरण और रेप के बारे में इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस मंजू रानी चौहान ने एक मामले में फैसला दिया है कि धोखे और दबाव में धर्मांतरण गैरकानूनी और गंभीर अपराध है। रेप के मामलों पर भी जस्टिस चौहान ने फैसले में कहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि धर्मांतरण हृदय परिवर्तन और भरोसे से हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि जबरन धर्मांतरण और रेप के मामलों में आरोपी और पीड़ित पक्ष में समझौता होने से केस रद्द नहीं हो सकता। जस्टिस मंजू रानी चौहान ने फैसले में कहा कि महिला की गरिमा से समझौता अपराध है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदू युवती के धर्मांतरण के मामले में आरोपी रामपुर के तौफीक अहमद की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि इस्लाम में धर्मांतरण तभी वास्तविक है, जब वयस्क और स्वस्थ मस्तिष्क का व्यक्ति हृदय परिवर्तन और खुद की मर्जी से पैगंबर मोहम्मद पर भरोसा करता हो। कोर्ट ने कहा कि धोखा और दबाव के जरिए धर्मांतरण व रेप गंभीर अपराध है। जस्टिस मंजू रानी चौहान ने फैसले में कहा कि धर्मांतरण को तभी वास्तविक माना जाता है, जब मूल धर्म की जगह नए धर्म के सिद्धांतों की तरफ ईमानदारी से भरोसा हो। कोर्ट ने कहा कि धर्मांतरण में आस्था और विश्वास में बदलाव होना शामिल है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वो धारा 482 के तहत अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर केस को रद्द नहीं करेगा। क्योंकि रेप और अवैध धर्मांतरण समाज और महिला की गरिमा के खिलाफ है। रामपुर के तौफीक अहमद ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर खुद के खिलाफ दर्ज रेप, जालसाजी और अवैध धर्मांतरण व अन्य धाराओं में दर्ज केस रद्द करने की अपील की थी। तौफीक पर हिंदू नाम रखकर इंटरनेट के जरिए पीड़ित हिंदू लड़की से दोस्ती करने और फिर उसे बुलाकर 6 महीने बंधक बनाने का आरोप लगा। लड़की को जब पता लगा कि आरोपी मुस्लिम है, तो वो उसके चंगुल से किसी तरह बच निकली और फिर केस दर्ज कराया। पीड़ित लड़की ने तौफीक के खिलाफ बयान भी दिया है।