वाराणसी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू एकता पर बड़ी बात कही है। वाराणसी में शुक्रवार को आरएसएस की शाम की शाखा में मोहन भागवत पहुंचे थे। मोहन भागवत ने यहां आरएसएस के गठन और उसके काम के बारे में बताया। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सभी हिंदुओं के लिए मंदिर, पानी और श्मशान एक होना चाहिए। भागवत ने कहा कि इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए आरएसएस काम कर रहा है। मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस का उद्देश्य है कि हिंदुओं के सभी पंथ, जाति और समुदाय साथ आएं। उन्होंने कहा कि आरएसएस चाहता है कि हिंदू संगठित हों।
इस साल दशहरा पर आरएसएस के गठन के 100 साल होने जा रहे हैं। इस बारे में पूछे गए एक सवाल पर मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस बीते सौ साल से जो काम कर रहा है, वही आगे भी करता रहेगा। मोहन भागवत ने आरएसएस के कार्यकर्ताओं से ये भी कहा कि वे भारतीय संस्कृति और भारतीय मूल्यों की रक्षा करें। साथ ही आदर्शों के प्रचार-प्रसार के लिए भी आरएसएस स्वयंसेवकों को निर्देश दिए। आईआईटी बीएचयू के छात्रों से मोहन भागवत ने ये भी जानना चाहा कि वो इन मुद्दों पर क्या सोचते हैं। करीब पौने घंटे तक मोहन भागवत ने बीएचयू के जिमखाना मैदान में लगी शाखा की गतिविधियां भी देखीं।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इससे पहले 16 फरवरी को पश्चिम बंगाल के बर्धमान में भी हिंदू एकता की बात कही थी। मोहन भागवत ने वहां हुए आरएसएस के कार्यक्रम में हिंदू समाज को भारत का जिम्मेदार समुदाय बताया था। उन्होंने तब ये भी कहा था कि वो हिंदू समाज में एकता को विविधता का प्रतीक मानते हैं। बर्धमान में हुए कार्यक्रम में भी मोहन भागवत ने कहा था कि आरएसएस हिंदू समाज को संगठित करना चाहता है। बता दें कि आरएसएस हिंदुओं का सबसे बड़ा संगठन है। आरएसएस में करीब 3 करोड़ स्वयंसेवक हैं। आरएसएस आपदा प्रभावित इलाकों में भी अपनी सेवाएं देता है। वो किसी तरह का भेदभाव भी नहीं करता। बिना जाति या धर्म पूछे मदद के लिए आरएसएस ने हमेशा खुद को आगे रखा है।